
उत्साह, उमंग एवं योगमय वातावरण के बीच हुआ। महोत्सव के चौथे एवं अंतिम दिन बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं, महिलाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए सामूहिक योगाभ्यास और राजयोग मेडिटेशन का लाभ लिया।वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका एवं फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. बीके मनीषा बहन ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय के कॉमन योग प्रोटोकॉल के अनुसार योगाभ्यास कराया गया। यह प्रोटोकॉल वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया है, जिससे प्रत्येक आयु वर्ग का व्यक्ति सुरक्षित रूप से योग का लाभ ले सके। इसमें ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, शलभासन, सेतुबंधासन तथा शवासन जैसे योगासन शामिल हैं। ताड़ासन शरीर की सही मुद्रा एवं संतुलन विकसित करता है, वृक्षासन एकाग्रता और संतुलन बढ़ाता है, पादहस्तासन रीढ़ एवं हैमस्ट्रिंग को लचीला बनाकर पाचन में सहायक होता है,

अर्ध चक्रासन एवं त्रिकोणासन मेरुदंड को सुदृढ़ बनाकर कमर और कंधों की जकड़न कम करते हैं, भुजंगासन एवं शलभासन पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं, सेतुबंधासन रीढ़, हृदय एवं फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, जबकि शवासन शरीर और मन को गहन विश्राम देकर तनाव एवं थकान को दूर करता है।उन्होंने आगे कहा कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान से शरीर स्वस्थ, मन शांत, विचार सकारात्मक तथा जीवन ऊर्जावान बनता है। योग हमें केवल रोगमुक्त ही नहीं, बल्कि संतुलित, अनुशासित और आनंदमय जीवन जीने की प्रेरणा देता है।उसलापुर सेवाकेंद्र की मुख्य संचालिका बीके छाया दीदी ने राजयोग मेडिटेशन का महत्व बताते हुए कहा कि “योग केवल शरीर को स्वस्थ बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि राजयोग मन, बुद्धि और संस्कारों को सशक्त एवं सकारात्मक बनाने की श्रेष्ठ विधि है। जब आत्मा परमात्मा शिव से अपना संबंध जोड़ती है, तब उसके भीतर शांति, शक्ति, प्रेम, पवित्रता और आनंद के दिव्य गुण स्वतः भरने लगते हैं।”उन्होंने कहा कि “यदि जीवन में सच्ची खुशी और संबंधों में मधुरता चाहिए, तो प्रत्येक आत्मा के प्रति शुभ भावना और शुभकामना का विशेष अटेंशन रखना होगा। प्रतिदिन यह संकल्प करें कि ‘मुझे हर आत्मा के प्रति शुभ भावना और शुभकामना रखनी ही है।’ परिस्थितियाँ आएँगी, लोगों के स्वभाव और संस्कार सामने आएँगे, लेकिन हमारा कार्य परिस्थितियों से प्रभावित होना नहीं, बल्कि अपनी श्रेष्ठ स्थिति से उन पर विजय प्राप्त करना है। बातों का काम है आना और माया का काम है परीक्षा लेना, किंतु हमारा कार्य हर परिस्थिति में सकारात्मकता, धैर्य और करुणा बनाए रखना है।”दीदी ने आगे कहा कि “जब हम स्वयं शुभ संकल्पों से भर जाते हैं, तब हमारे विचार, वाणी और कर्म दूसरों के जीवन में भी आशा, शांति और प्रेरणा का संचार करते हैं। राजयोग हमें यही कला सिखाता है कि हम स्वयं भी खुश रहें और अपने श्रेष्ठ संकल्पों एवं शुभकामनाओं से परिवार, समाज तथा विश्व में सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करें। आज विश्व को केवल स्वस्थ शरीर नहीं, बल्कि शुभभावना से भरपूर, शांत और सशक्त मन की आवश्यकता है। योग और राजयोग का समन्वय ही सम्पूर्ण स्वास्थ्य और विश्व कल्याण का आधार है।”कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने प्रतिदिन शारीरिक योग, प्राणायाम एवं राजयोग मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने तथा स्वस्थ, संतुलित एवं तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव ने प्रतिभागियों को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक शांति, आध्यात्मिक सशक्तता एवं सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान की।
