
सतना/ अखिल भारतीय सिंधु संत समाज ट्रस्ट (रजि.) ने मानवता की सेवा का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के बीच मिष्ठान और फल वितरण का आयोजन किया। इस सेवा कार्य ने अस्पताल परिसर में एक सकारात्मक और उत्साहपूर्ण वातावरण का निर्माण किया।
कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य स्वामी खिम्यादास जी महाराज और प्रदेश उपाध्यक्ष महंत स्वामी ईश्वरदास उदासीन जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। संतों ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में जाकर मरीजों का कुशलक्षेम जाना और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
इस अवसर पर श्रद्धेय संतों ने मानवता के प्रति अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा “पीड़ित, असहाय एवं रोगग्रस्त लोगों की सेवा ही सच्ची मानवता और ईश्वर की वास्तविक उपासना है। सेवा, करुणा और संवेदना ही समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।”
राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी हंसदास जी ने जानकारी दी कि ट्रस्ट निरंतर जन-सेवा के कार्यों के लिए समर्पित है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य संकटों या किसी भी कठिन परिस्थिति में जरूरतमंदों को भोजन, दवाइयां और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना ट्रस्ट के मुख्य उद्देश्यों में शामिल है।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सेवादारों ने मरीजों व उनके परिजनों का उत्साहवर्धन किया और सक्रिय रूप से सेवा कार्य में योगदान दिया। इस अभियान ने न केवल मरीजों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि समाज को यह सशक्त संदेश भी दिया कि “मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।”
अखिल भारतीय सिंधु संत समाज ट्रस्ट द्वारा जिला अस्पताल में सेवा कार्य संपन्न
सतना/ अखिल भारतीय सिंधु संत समाज ट्रस्ट (रजि.) ने मानवता की सेवा का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के बीच मिष्ठान और फल वितरण का आयोजन किया। इस सेवा कार्य ने अस्पताल परिसर में एक सकारात्मक और उत्साहपूर्ण वातावरण का निर्माण किया।
कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य स्वामी खिम्यादास जी महाराज और प्रदेश उपाध्यक्ष महंत स्वामी ईश्वरदास उदासीन जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। संतों ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में जाकर मरीजों का कुशलक्षेम जाना और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
इस अवसर पर श्रद्धेय संतों ने मानवता के प्रति अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा “पीड़ित, असहाय एवं रोगग्रस्त लोगों की सेवा ही सच्ची मानवता और ईश्वर की वास्तविक उपासना है। सेवा, करुणा और संवेदना ही समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।”
राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी हंसदास जी ने जानकारी दी कि ट्रस्ट निरंतर जन-सेवा के कार्यों के लिए समर्पित है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य संकटों या किसी भी कठिन परिस्थिति में जरूरतमंदों को भोजन, दवाइयां और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना ट्रस्ट के मुख्य उद्देश्यों में शामिल है।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सेवादारों ने मरीजों व उनके परिजनों का उत्साहवर्धन किया और सक्रिय रूप से सेवा कार्य में योगदान दिया। इस अभियान ने न केवल मरीजों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि समाज को यह सशक्त संदेश भी दिया कि “मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।”
