
…जशपुर। जिले में अनुकंपा और संविदा नियुक्तियों की प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पत्थलगांव क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों और स्थापित नियमों की कथित तौर पर अनदेखी कर एक युवक को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने का आरोप लगा है। स्थानीय जागरूक नागरिकों और युवाओं ने इस प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।क्या है पूरा मामला? – प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के नियमों के तहत यदि किसी दिवंगत शासकीय सेवक के आश्रितों में से कोई भी सदस्य पहले से ही सरकारी सेवा (शासकीय नौकरी) में कार्यरत है, तो परिवार के किसी अन्य सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का पात्रता लाभ नहीं दिया जा सकता।विवादित मामले में आरोप है कि एक दिवंगत शिक्षक के पुत्र रविंद्र निषाद को कलेक्टोरेट प्रशासन द्वारा अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। जबकि, शिकायतकर्ताओं का दावा है कि रविंद्र निषाद के बड़े भाई पहले से ही शासन के अंतर्गत ‘क्लास-1’ (श्रेणी-एक) के उच्च पद पर कार्यरत हैं। नियमों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में परिवार का दूसरा सदस्य अनुकंपा नियुक्ति के लिए अपात्र माना जाता है।झूठे शपथ पत्र (हलफनामे) का आरोप – मामले से जुड़े दस्तावेजों और नोटरीकृत शपथ पत्र (दिनांक 15.06.2020) के अनुसार, आवेदक रविंद्र निषाद ने प्रशासन के समक्ष यह लिखित प्रतिज्ञान दिया था कि उनके परिवार का कोई भी अन्य सदस्य शासकीय सेवा में कार्यरत नहीं है।जागरूक नागरिकों का आरोप है कि आवेदक ने तथ्यों को छुपाकर और गलत जानकारी देकर विभाग को गुमराह किया। वहीं दूसरी ओर, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठ रही हैं कि इतनी महत्वपूर्ण नियुक्ति से पूर्व संबंधित विभाग और कलेक्टोरेट अमले द्वारा आवेदक के पारिवारिक विवरण का उचित सत्यापन (वेरिफिकेशन) क्यों नहीं किया गया।स्थानीय युवाओं में आक्रोश, बड़े आंदोलन की चेतावनी – इस कथित विसंगति के सामने आने के बाद जिले के योग्य और बेरोजगार युवाओं में भारी निराशा और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां एक तरफ सैकड़ों योग्य युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रसूख और गलत जानकारियों के सहारे अपात्र लोग सरकारी पदों का लाभ उठा रहे हैं।आगामी कदम और कार्रवाई की मांग – बताया जा रहा है कि इस मामले से जुड़े सभी पुख्ता साक्ष्य, शपथ पत्र की प्रतियां और अन्य आवश्यक दस्तावेज जल्द ही जशपुर कलेक्टर के समक्ष औपचारिक शिकायत के रूप में प्रस्तुत किए जाएंगे।जनता और पीड़ितों की मुख्य मांगें :* मामले की उच्च स्तरीय और समयबद्ध निष्पक्ष जांच कराई जाए।* दोषी पाए जाने पर संबंधित आवेदक के खिलाफ कूटरचना (धोखाधड़ी) और गलत शपथ पत्र देने के आरोप में कानूनी कार्रवाई (FIR) दर्ज हो।* गलत तरीके से प्राप्त की गई नौकरी को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और अब तक भुगतान किए गए शासकीय वेतन की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।अब देखना यह होगा कि इस गंभीर शिकायत और दस्तावेजों के सामने आने के बाद जशपुर जिला प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या पात्र अभ्यर्थियों को न्याय मिल पाता है।
