
बिलासपुर। प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल परिसरों एवं आसपास आवारा कुत्तों की समस्या पर अब नियमित निगरानी रखी जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को निर्देश जारी करते हुए स्कूलों में किए जा रहे सुरक्षा प्रबंधों की सतत समीक्षा करने तथा हर माह इसकी रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों की आवाजाही रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए गए हैं या नहीं। इसके अलावा स्कूलों में बाउंड्रीवाल, फर्स्ट एड बॉक्स, सुरक्षा संबंधी अन्य व्यवस्थाओं तथा जागरूकता गतिविधियों की भी नियमित जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। डीपीआई ने स्पष्ट किया है कि यह निगरानी केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेश के सभी निजी विद्यालय भी इसके दायरे में शामिल होंगे। डीईओ और बीईओ अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन करेंगे तथा प्रत्येक माह निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही स्कूलों में सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, नगर निगम अथवा स्थानीय प्रशासन की हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों, उनके निराकरण तथा की गई कार्रवाई का पूरा विवरण भी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूलों के आसपास बढ़ रही आवारा कुत्तों की समस्या बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए डिजिटल मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की गई है, ताकि सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा हो सके और किसी भी संभावित खतरे का समय रहते समाधान किया जा सके। नई व्यवस्था के लागू होने से स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं भयमुक्त शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
