
बिलासपुर। जिले के कोटा विकासखंड में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। पिछले चार दिनों में 14 नए मरीजों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में व्यापक जांच एवं रोकथाम अभियान तेज कर दिया है। अब तक विभाग की टीमें 1200 से अधिक घरों में पहुंचकर सर्वे, जांच और लोगों को जागरूक करने का कार्य कर चुकी हैं।
कोटा क्षेत्र के संवेदनशील गांवों में सर्वे, जांच और उपचार अभियान तेज
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, शनिवार को केंदा, विचारपुर, औरापानी तथा नवाडीह सहित विभिन्न गांवों में जांच के दौरान चार नए मरीज मिले। जुलाई माह में अब तक कुल 14 मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि पिछले छह महीनों में केवल 18 मरीज मिले थे। इससे स्पष्ट है कि बारिश के मौसम के साथ संक्रमण की रफ्तार बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोटा क्षेत्र के घने जंगल, जलभराव और मच्छरों के अनुकूल वातावरण के कारण यहां मलेरिया का खतरा अधिक रहता है। विभाग ने ऐसे लगभग 70 गांवों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया है, जहां लगातार निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर पहुंचकर बुखार से पीड़ित लोगों की जांच कर रही है तथा लक्षण मिलने पर तत्काल उपचार शुरू किया जा रहा है। अब तक मिले मरीजों में अधिकांश बच्चे शामिल हैं। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गनियारी में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य मरीजों का उपचार घर एवं स्वास्थ्य केंद्रों में जारी है। इस बीच जिला प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। कलेक्टर के निर्देश पर प्रभावित गांवों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है तथा स्वास्थ्य विभाग, मलेरिया नियंत्रण दल और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें तथा साफ-सफाई बनाए रखें। विभाग का कहना है कि समय पर जांच और उपचार से मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
स्वास्थ्य विभाग का संदेश
“बारिश के मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। बुखार होने पर तुरंत जांच कराएं और मच्छरों से बचाव के सभी उपाय अपनाएं।”
