
रायपुर। श्रावण मास के पावन अवसर पर श्री दुर्गा माता मंदिर, मढ़ी (लिली चौक), पुरानी बस्ती रायपुर में आयोजित शिव अमृत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा का वाचन करते हुए महंत तुलसीदास उदासी जी ने कहा कि मानव जीवन के उद्धार एवं संदेह के नाश के लिए कथा श्रवण अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने भगवान शिव एवं माता सती के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीराम वनवास में थे, तब माता सती के मन में उनके स्वरूप को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ। भगवान शिव द्वारा समझाने के बाद भी उनका संशय दूर नहीं हुआ। इस प्रसंग से शिक्षा मिलती है कि जीवन के भ्रम और संदेह को दूर करने के लिए सत्संग और कथा का श्रवण आवश्यक है।
महंत तुलसीदास उदासी जी ने कहा कि कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और मानसिक शांति का माध्यम है। यदि कथा में बताई गई शिक्षाओं को जीवन में अपनाया जाए तो मनुष्य का जीवन सफल हो सकता है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की भक्ति से ओत-प्रोत अमृतमयी कथा सुनने का सौभाग्य बड़े-बड़े धनवानों को भी नहीं मिलता। यह सौभाग्य केवल पुण्यात्माओं को प्राप्त होता है।
उन्होंने संतों के सान्निध्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के सोशल मीडिया और दिखावे के दौर में सच्चे संत की पहचान करना कठिन हो गया है। भीड़, प्रचार और अडंबर देखकर किसी को संत नहीं मान लेना चाहिए। सच्चा संत वही है जो सत्य के मार्ग पर चलने और धर्म की सही दिशा दिखाने का कार्य करे।
महंत जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि दूध बेचने वाले को घर-घर जाना पड़ता है,

जबकि शराब खरीदने वाला स्वयं दुकान तक पहुंच जाता है। इसी प्रकार सत्य का मार्ग कठिन अवश्य है, लेकिन अंततः वही कल्याणकारी होता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज अपनी संस्कृति, भाषा, परंपराओं और सनातन मूल्यों से दूर होता जा रहा है, जिसके कारण अनेक सामाजिक विकृतियां जन्म ले रही हैं। इनसे मुक्ति पाने के लिए सच्चे संतों का सत्संग और धर्म का अनुसरण आवश्यक है।
कथा के समापन पर भगवान शिव की भव्य आरती हुई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। पूरे कार्यक्रम का सोशल मीडिया के माध्यम से सीधा प्रसारण भी किया गया, जिसे हजारों श्रद्धालुओं ने घर बैठे देखा।
इस अवसर पर संत साईं जल कुमार मसंद विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रथम बार सिंधी भाषा में इतने उच्चकोटि के संत के श्रीमुख से शिव अमृत कथा सुनने का अवसर मिलना अत्यंत सौभाग्य की बात है। उन्होंने आयोजन के लिए सद्गुरु महंत अनंतपुरी गोस्वामी जी का आभार व्यक्त किया तथा सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम का कवरेज करने के लिए हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने संतजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा कथा के प्रमुख प्रसंगों का समाचार संकलन किया।
