– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। बालाजी गैस एजेंसी में गैस सिलेंडरों के स्टॉक को लेकर गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर राजस्व, खाद्य विभाग और आईओसीएल की संयुक्त टीम ने एजेंसी के मगरपारा स्थित कार्यालय तथा महाराणा चौक स्थित गोदाम में जांच की। जांच के दौरान ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध सिलेंडरों की संख्या में बड़ा अंतर पाया गया। जांच टीम के अनुसार, एजेंसी के ऑनलाइन रिकॉर्ड में 864 भरे सिलेंडर दर्ज थे, जबकि मौके पर जांच के दौरान केवल 452 भरे सिलेंडर मिले। यानी रिकॉर्ड की तुलना में 412 भरे सिलेंडर कम पाए गए। इसी तरह रिकॉर्ड में 473 खाली सिलेंडर दर्ज थे, जबकि मौके पर 487 खाली सिलेंडर मिले। इस प्रकार खाली सिलेंडरों की संख्या भी रिकॉर्ड से 14 अधिक मिली।
939 सिलेंडर जब्त, रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
स्टॉक में अंतर सामने आने के बाद जांच टीम ने मौके पर मौजूद कुल 939 सिलेंडरों को अपने कब्जे में लेकर जब्ती की कार्रवाई की। इनमें 452 भरे और 487 खाली सिलेंडर शामिल हैं। टीम ने एजेंसी के स्टॉक रजिस्टर, ऑनलाइन रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों की भी जांच की है। अब इन दस्तावेजों का मौके पर मिले स्टॉक से मिलान किया जा रहा है।
उपभोक्ताओं की शिकायतों ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
जांच के दौरान उपभोक्ताओं से भी पूछताछ की गई। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि गैस सिलेंडर की बुकिंग कराने और ऑनलाइन डिलीवरी दर्ज होने के बावजूद उन्हें समय पर वास्तविक रूप से सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया। एजेंसी के खिलाफ कॉल सेंटर तथा सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायतें दर्ज होने की जानकारी भी जांच के दौरान सामने आई।
412 सिलेंडरों का अंतर बना बड़ा सवाल
रिकॉर्ड में दर्ज भरे सिलेंडरों और मौके पर मिले सिलेंडरों के बीच 412 का अंतर जांच का सबसे अहम बिंदु बन गया है। सवाल यह है कि रिकॉर्ड में दर्ज ये सिलेंडर मौके से कहां गए और खाली सिलेंडरों की संख्या रिकॉर्ड से अधिक कैसे हो गई। क्या स्टॉक का रिकॉर्ड सही तरीके से संधारित नहीं किया गया या फिर सिलेंडरों की आपूर्ति एवं वितरण प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई इसका खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
सात दिन में मांगी गई जांच रिपोर्ट
प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के लिए संयुक्त टीम को जिम्मेदारी सौंपी है। टीम ऑनलाइन रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, दस्तावेजों और उपभोक्ताओं की शिकायतों का मिलान करेगी। जांच पूरी होने के बाद सात दिनों के भीतर रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपे जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के आधार पर गैस एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।बहरहाल, रिकॉर्ड और मौके के स्टॉक में मिले इस बड़े अंतर ने गैस वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि यह अंतर किस वजह से सामने आया और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
