विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 से बैंकिंग, रेलवे, इंटरनेट और पावर ग्रिड पर बड़ा असर
भारत की बदलती तस्वीर में अब समय की भी बारी! -घड़ी की सुई से डिजिटल क्रांति तक: एक राष्ट्र एक समय से बदलने जा रहा भारत!- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया वैश्विक स्तरपर आज का भारत तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी,डिजिटल अर्थव्यवस्था और आधुनिक संचार व्यवस्था के दौर से गुजर रहा है। कभी देश में एक राष्ट्र, एक चुनाव,एक राष्ट्र, एक कर,एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड एक राष्ट्र,एक ग्रिड,एक राष्ट्र, एक बाजार,एक राष्ट्र, एक कानून/समान नागरिक संहिता यानें यूनिफार्म सिविल कोड यानी समान नागरिक कानून की बहस/प्रस्ताव।एक राष्ट्र एक समय,पूरे देश की महत्वपूर्ण आधिकारिक और तकनीकी प्रणालियों के लिए आईएसटी को साझा समय-संदर्भ बनाना,जैसी अवधारणाओं पर चर्चा होती है,इसी व्यापक सोच की अगली महत्वपूर्ण कड़ी अब एक राष्ट्र, एक समय के रूप में सामने आ रही है। इसका सीधा अर्थ है कि भारत में कानूनी,प्रशासनिक, व्यावसायिक और महत्वपूर्ण तकनीकी कार्यों के लिए भारतीय मानक समय यानी आईएसटी को एक समान आधिकारिक समय-संदर्भ बनाया जाएगा।सुनने में यह केवल घड़ी का समय एक करने जैसा लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह भारत की डिजिटल और तकनीकी व्यवस्था को अधिक सुरक्षित,सटीक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह चाहूंगा कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारत में समय की आधिकारिक व्यवस्था क्या है। देश में भारतीय मानक समय यानी इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (आईएसटी) लागू है,जो पूरे भारत के लिए एक ही आधिकारिक समय है।सामान्य जीवन में हम मोबाइल,कंप्यूटर,घड़ी या टीवी पर यही समय देखते हैं। लेकिन आधुनिक डिजिटल व्यवस्था में केवल घंटे और मिनट महत्वपूर्ण नहीं हैं। बैंकिंग लेन-देन, शेयर बाजार, इंटरनेट नेटवर्क,रेलवे सिग्नल, बिजली ग्रिड, डिजिटल भुगतान और सरकारी सर्वर जैसी प्रणालियों में सेकंड के छोटे हिस्से तक का समय महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी डिजिटल लेन-देन का सही समय दर्ज होनाकई बार यह तय करता है कि भुगतान पहले हुआ या बाद में, आदेश कब दिया गया या किसी सिस्टम में कोई घटना ठीक किस समय हुई।टेलीकॉम ऑपरेटरों (जैसे बीएसएनएल, जिओ,एयरटेल) को अपने सर्वर्स और नेटवर्क टावरों को भारतीय परमाणु घड़ियों (एटॉमिक क्लॉक्स) के समय के साथ सिंक करना होगा।सटीक बिलिंग: डेटा उपयोग और कॉलिंग की समय-सीमा आधारित बिलिंग में ग्राहकों को अधिक पारदर्शिता मिलेगी।
साथियों, इसी आवश्यकता को देखते हुए उपभोक्ता मामले विभाग ने 27 अगस्त 2026 को विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की है। इन नियमों का उद्देश्य देशभर में कानूनी, प्रशासनिक,व्यावसायिक और अन्य आधिकारिक उद्देश्यों के लिए भारतीय मानक समय को एक समान समय -संदर्भ के रूप में स्थापित करना है। नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से 180 दिन बाद लागू होंगे।यह 180 दिनों की अवधि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार,कंपनियों,संस्थानों और तकनीकी प्रणालियों को अपने सर्वर,नेटवर्कसॉफ्टवेयर और समय-संबंधी व्यवस्थाओं में आवश्यक बदलाव करने का अवसर मिलेगा।
साथियों, एक राष्ट्र,एक समय की जरूरत आज इसलिए बढ़ गई है क्योंकि भारत अब केवल भौतिक अर्थव्यवस्था नहीं रहा।देश की अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा हिस्साडिजिटल नेटवर्क पर चलता है।एक व्यक्ति अपनेमोबाइल से कुछ सेकंड में दूसरे शहर में पैसा भेज सकता है। शेयर बाजार में हजारों लेन-देन अत्यंत कम समय में हो सकते हैं। बैंक के सर्वर देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हो सकते हैं। मोबाइल नेटवर्क लाखों उपकरणों को एक साथ जोड़ते हैं।बिजली ग्रिड लगातार उत्पादन और खपत का संतुलन बनाए रखते हैं। रेलवे और विमानन व्यवस्था समय के बेहद सटीक तालमेल पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि अलग-अलग प्रणालियां अलग-अलग समय स्रोतों पर निर्भर हों और उनमें सूक्ष्म अंतर हो, तो डिजिटल रिकॉर्ड और विभिन्न प्रणालियों के बीच समन्वय प्रभावित हो सकता है।यही कारण है कि एक समान समय-संदर्भ केवल घड़ी मिलाने का मामला नहीं है, बल्कि डिजिटल भारत की आधारभूत संरचना को मजबूत करने का विषय है। बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में प्रत्येक लेन-देन का टाइम- स्टैम्प महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति के खाते से पैसा कट गया लेकिन सामने वाले खाते में राशि कुछ देर बाद दिखाई दी, तो दोनों प्रणालियों में दर्ज समय की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।एक विश्वसनीय और समान समय व्यवस्था ऐसे तकनीकी विवादों के समाधान को बहुत अधिक सटीकता से व्यवस्थित बना सकती है।
साथियों इसका असर शेयर बाजार परिवहन व दूर संचार पर भी महत्वपूर्ण हो सकता है। आधुनिक शेयर बाजार में हजारों और लाखों ऑर्डर बहुत कम समय में दर्ज होते हैं। किस ऑर्डर को पहले दर्ज किया गया,किस समय कारोबार हुआ और किसी विशेष गतिविधि का टाइम- स्टैम्प क्या था,ये सभी बातें बाजार की पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण हैं।भारतीय मानक समय पर आधारित अधिक सटीक समय-सिंक्रोनाइजेशन से वित्तीय बाजारों में रिकॉर्डिंग और निगरानी की व्यवस्था मजबूत हो सकती है।परिवहन क्षेत्र में भी इसका महत्व कम नहीं है। रेलवे में सिग्नलिंग, ट्रेन संचालन और समय- सारणी के लिए सटीक समय जरूरी है। हवाई अड्डों पर उड़ानों, सुरक्षा प्रक्रियाओं और विभिन्न परिचालन गतिविधियों का समन्वय समय के आधार पर होता है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में ट्रकों, मालगाड़ियों और अन्य परिवहन माध्यमों की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है। इसलिए समान और विश्वसनीय समय-संदर्भ सप्लाई चेन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।दूरसंचार और इंटरनेट की दुनिया में समय- सिंक्रोनाइजेशन और भी महत्वपूर्ण है। मोबाइल नेटवर्क के अलग-अलग टावरों और नेटवर्क उपकरणों को एक- दूसरे के साथ तालमेल बनाकर काम करना पड़ता है। डेटा सेंटर और कंप्यूटर नेटवर्क भी समय के सटीक रिकॉर्ड पर निर्भर करते हैं। यही कारण है कि भारत में अपने विश्वसनीय समय-स्रोतों का विकास रणनीतिक महत्व रखता है।भविष्य में महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए विदेशी समय-स्रोतों पर निर्भरता कम करना भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत कर सकता है।
साथियों, इसी संदर्भ में भारत की स्वदेशी उपग्रह प्रणाली नाविक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नाविक भारत की क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है, जिसे इसरो ने विकसित किया है। उपग्रह-आधारित प्रणालियों से सटीक समय-संदर्भ प्राप्त किया जा सकता है। इसके साथ भारत अपने वैज्ञानिक और मेट्रोलॉजी संस्थानों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर सटीक भारतीय मानक समय के प्रसार का बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण प्रणालियों को विश्वसनीय भारतीय समय-स्रोत उपलब्ध कराना है।इसी दिशा में वाइट रैबिट तकनीक भी महत्वपूर्ण है।सरल भाषा में समझें तो यह अत्यंत सटीक नेटवर्क टाइम- सिंक्रोनाइजेशन तकनीक है, जो फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से बहुत छोटे समय-अंतर को भी मापने और नियंत्रित करने में सक्षम है। जुलाई 2026 में बेंगलुरु स्थित क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला में वाइट रैबिट आधारित भारतीय मानक समय प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क का शुभारंभ किया गया। इसके माध्यम से बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में आईएसटी के सुरक्षित और सटीक प्रसार की क्षमता का सटिका से प्रदर्शन किया गया।
साथियों बिजली क्षेत्र में भी एक राष्ट्र, एक समय का प्रभाव दिखाई देगा। भारत का बिजली ग्रिड विशाल और जटिल है। अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली उत्पादन, वितरण और खपत को लगातार संतुलित करना पड़ता है। ग्रिड के विभिन्न हिस्सों से आने वाले डेटा को सही समय के साथ रिकॉर्ड करना आवश्यक है। सटीक समय- सिंक्रोनाइजेशन से बिजली व्यवस्था की निगरानी, समस्या की पहचान और ग्रिड संचालन में बेहतर समन्वय संभव हो सकता है।सरकारी और कानूनी रिकॉर्ड के लिए भी एक समान समय-संदर्भ महत्वपूर्ण है। सरकारी आदेश, डिजिटल दस्तावेज, आवेदन, लाइसेंस, भुगतान, रिकॉर्ड और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में समय दर्ज होता है। जब पूरे देश में आधिकारिक कार्यों के लिए एक समान भारतीय मानक समय का उपयोग होगा, तो रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित हो सकती है। आपातकालीन सेवाओं में भी समय का महत्व अत्यधिक होता है, जहां कुछ सेकंड या मिनट का अंतर महत्वपूर्ण परिणाम सटीकता से पैदा कर सकता है।
साथियों हालांकि इस व्यवस्था को लागू करना केवल नियम जारी करने से पूरा नहीं होगा। अगले 180 दिन तकनीकी तैयारी के लिए महत्वपूर्ण होंगे। सरकारी विभागों, बैंकों, वित्तीय संस्थानों, डेटा सेंटरों, दूरसंचार कंपनियों, परिवहन संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण संगठनों को अपनी वर्तमान समय-स्रोत व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सर्वर,नेटवर्क उपकरण सॉफ्टवेयर और टाइम- सिंक्रोनाइजेशन प्रणालियां नए नियमों के अनुरूप हों। यही वह चरण होगा जहां एक राष्ट्र, एक समय की अवधारणा कागज से निकलकर वास्तविक डिजिटल बुनियादी ढांचे में दिखाई देगी।
साथियों,भारत में एक राष्ट्र की अवधारणा के साथ कई क्षेत्रों में एकरूपता लाने की कोशिशें पहले भी हुई हैं। एक राष्ट्र, एक कर के रूप में जीएसटी ने अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एक बड़े साझा ढांचे में लाने का प्रयास किया। एक राष्ट्र, एक चुनाव का विचार देश में चुनावों के समय और प्रक्रिया को एक साथ करने की बहस से जुड़ा है। इसी क्रम में एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड ने लाभार्थियों को देश के अलग-अलग हिस्सों में खाद्यान्न सुविधा से जोड़ने की दिशा में काम किया। अब एक राष्ट्र, एक समय भौतिक नहीं बल्कि डिजिटल और तकनीकी एकरूपता का नया अध्याय खोलता है।इस पहल का सबसे बड़ा संदेश यही है कि आधुनिक भारत में समय स्वयं एक डिजिटल संसाधन बन चुका है।पहले समय का मतलब केवल घड़ी की सुई था, लेकिन आज समय बैंकिंग रिकॉर्ड है, डिजिटल भुगतान का प्रमाण है,इंटरनेट नेटवर्क का आधार है, शेयर बाजार की गतिविधि का हिस्सा है, बिजली ग्रिड के संचालन का महत्वपूर्ण तत्व है और सरकारी डिजिटल रिकॉर्ड की पहचान भी है। इसलिए पूरे देश में एक विश्वसनीय, सुरक्षित और सटीक समय-संदर्भ विकसित करना भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए आधारभूत आवश्यकता बनता जा रहा है।
*-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318*
