बिलासपुर। भोजली के पावन पर्व पर बिलासपुर के पचरी घाट, तोरवा एवं शनिचरी रपटा में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। प्रवीण झा
इन आयोजनों में शामिल होकर लोक संस्कृति और परंपराओं के जीवंत स्वरूप का अनुभव करने का अवसर मिला।
मां बिलास लोक संस्कृति एवं कला मंच, भोजली महोत्सव समिति एवं अगवाही जनकल्याण समिति के स्नेहिल आमंत्रण पर कार्यक्रमों में पहुंचने पर आयोजकों एवं उपस्थित लोगों ने आत्मीयता के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम स्थलों पर भोजली की पारंपरिक पूजा-अर्चना, लोकगीतों की मधुर धुन और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की रंगत ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
इस अवसर पर कहा गया कि भोजली पर्व केवल एक धार्मिक एवं पारंपरिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी माटी, अपनी परंपराओं और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है। हमारी असली पहचान हमारी संस्कृति और लोक परंपराओं में ही निहित है।
कार्यक्रमों में मिले स्नेह और आत्मीयता के लिए आयोजकों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए सभी को भोजली पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं।
जय छत्तीसगढ़! जय जोहार! 🌾
