बिलासपुर। रतनपुर क्षेत्र को कृषि उत्पादन और कृषि आधारित गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। रतनपुर स्थित माँ महामाया मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर के आसपास लगभग 30 किलोमीटर के दायरे को ‘एग्रीकल्चर हब’ के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। योजना के तहत आसपास के किसानों को आधुनिक और व्यावसायिक खेती से जोड़ा जाएगा। बताया गया है कि इस क्षेत्र के 342 किसान इस पहल से लाभान्वित होंगे।
महामाया मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगा स्थानीय और ताजा कृषि उत्पादों का लाभ
किसानों को फल, फूल, सब्जियों तथा अन्य कृषि उत्पादों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को ताजे एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो सकें।
बोरा के तीन लाख पौधे तैयार
कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बोरा के लगभग तीन लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इससे किसानों को खेती के नए अवसर मिलने के साथ ही क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
75 प्रतिशत सब्सिडी का मिलेगा लाभ
योजना के अंतर्गत किसानों को कृषि गतिविधियों के विस्तार के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। पात्र किसानों को आवश्यक सुविधाओं एवं संसाधनों पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। इससे किसानों को आधुनिक खेती अपनाने और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
श्रद्धालुओं के साथ किसानों को भी होगा लाभ
माँ महामाया मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में एग्रीकल्चर हब विकसित होने से उन्हें स्थानीय स्तर पर फल, फूल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद आसानी से उपलब्ध होंगे। वहीं किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर और स्थायी बाजार मिलेगा। यह योजना रतनपुर क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ कृषि, उद्यानिकी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
