
समस्तीपुर। बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला समस्तीपुर रेलवे स्टेशन का है, जहां नई दिल्ली से जयनगर जा रही स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के एसी फर्स्ट क्लास कोच से करीब 75 लीटर विदेशी शराब बरामद होने के बाद एक युवती समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
जानकारी के मुताबिक, समस्तीपुर रेल मंडल की आरपीएफ और सीआईबी टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि ट्रेन संख्या 12562 के एसी फर्स्ट क्लास कोच में शराब की खेप लाई जा रही है। सूचना के आधार पर टीम ने समस्तीपुर स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचने का इंतजार किया। ट्रेन के पहुंचते ही एच-1 कोच में तलाशी अभियान चलाया गया।
तलाशी के दौरान एक युवती के पास मौजूद दो सूटकेस की जांच की गई। सूटकेस खुलने पर उनमें बड़ी मात्रा में ब्रांडेड विदेशी शराब की बोतलें मिलीं। पुलिस के अनुसार बरामद शराब की मात्रा करीब 75 लीटर है।
पुलिस ने युवती की पहचान नेहा कुमारी के रूप में की है। उसके साथ यात्रा कर रहे ईशान कुमार, जो हरियाणा के करनाल का रहने वाला बताया गया है, को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और मामले में राजकीय रेल थाना में प्रकरण दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
बिना टिकट यात्रा की भी बात सामने आई
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान युवती के पास वैध यात्रा टिकट नहीं होने की बात भी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि दोनों एसी फर्स्ट क्लास के एक कूपे में यात्रा कर रहे थे। हालांकि, इस संबंध में अंतिम तथ्य पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होंगे।
शराब के नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कहां से लाई गई थी, इसे बिहार में किसे पहुंचाया जाना था और इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बरामद शराब की कीमत करीब 1.5 लाख रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ उनके संपर्कों और संभावित शराब तस्करी नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।
बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण शराब की अवैध खरीद-बिक्री, परिवहन और तस्करी कानूनन अपराध है। ऐसे में ट्रेन के एसी फर्स्ट क्लास कोच से इतनी बड़ी मात्रा में शराब बरामद होना रेल पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी गंभीर मामला माना जा रहा है।
यह खबर प्रकाशित करते समय “आरोपी”, “पुलिस के अनुसार” और “कथित” जैसे शब्द रखना उचित रहेगा, क्योंकि मामले में अंतिम दोष अदालत के निर्णय के बाद ही तय होगा।
