बिलासपुर। श्री सिंधु अमर धाम आश्रम, चकरभाठा के संत साईं लाल दास जी के श्रीमुख से बिलासपुर स्थित पूज्य पंचायत भवन, भक्त कंवरराम नगर में भगवान झूलेलाल जी की अमर कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह कथा 8 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक आयोजित हो रही है। कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान झूलेलाल जी की महिमा का श्रवण कर भावविभोर हो गए।
संत साईं लाल दास जी ने अपनी अमृतवाणी में भगवान झूलेलाल जी के अवतरण की कथा सुनाते हुए बताया कि प्राचीन सिंध क्षेत्र में हिंदू समाज के लोग सुख-शांति से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। उस समय मिरखशाह नामक शासक ने हिंदुओं पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। उसने आदेश दिया कि जो लोग इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं करेंगे, उन्हें कठोर दंड दिया जाएगा। इसके बाद हिंदू समाज पर अत्याचार बढ़ने लगे।
संत जी ने बताया कि अत्याचारों से परेशान होकर समाज के लोग एकत्रित हुए और शासक से अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता मांगी। लेकिन शासक ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया और धर्म परिवर्तन के लिए केवल तीन दिन का समय दिया। संकट की इस घड़ी में निराश और चिंतित हिंदू समाज के लोग सिंधु नदी के तट पर पहुंचे और भगवान वरुण देव की आराधना करते हुए अपनी रक्षा की प्रार्थना करने लगे
मान्यता के अनुसार, श्रद्धालुओं की प्रार्थना से प्रसन्न होकर आकाशवाणी हुई कि जल्द ही माता देवकी और पिता रतनराय के घर वरुण देव अवतार लेंगे और राजा के अत्याचारों से पीड़ित हिंदू समाज की रक्षा करेंगे। इसके बाद चेटीचंड के पावन अवसर पर भगवान उदयचंद, जिन्हें भगवान झूलेलाल के नाम से भी जाना जाता है, का अवतरण हुआ। भगवान के जन्म का समाचार सुनकर श्रद्धालु खुशी से झूम उठे और चारों ओर जयकारे गूंजने लगे।
झूलेलाल के बाल स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर हुए भक्त
कथा पंडाल में भी भगवान झूलेलाल जी के जन्मोत्सव का दृश्य बड़े श्रद्धाभाव से प्रस्तुत किया गया। अनेक श्रद्धालु भगवान झूलेलाल जी की छोटी-छोटी मूर्तियां सजाकर लेकर पहुंचे। वहीं, एक झूले में छोटे बच्चे को भगवान झूलेलाल के बाल स्वरूप में सजाकर विराजमान किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। पूरा पंडाल भगवान झूलेलाल जी के जयकारों से गूंज उठा।
संत साईं लाल दास जी ने अनेक भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी, जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। भजनों और भगवान की महिमा के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कार्यक्रम के अंत में भगवान झूलेलाल जी की आरती की गई। विश्व कल्याण एवं सुख-समृद्धि की कामना के साथ पल्लव की रस्म संपन्न हुई। इसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया तथा आम भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में झूलेलाल सेवा समिति, बिलासपुर के सभी सेवादारों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसके जरिए हजारों लोगों ने घर बैठे भगवान झूलेलाल जी की अमर कथा का आनंद लिया।
कार्यक्रम की कवरेज के लिए ‘हमर संगवारी’ के संपादक विजय दुसेजा भी पहुंचे और उन्होंने पूरे आयोजन की गतिविधियों को कवर किया।
जय झूलेलाल!
