
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय स्वर्णिम एरा में चैतन्य देवियों की भव्य और अलौकिक झांकी का दिव्य आयोजन
स्वर्णिम एरा, बिलासपुर
नवरात्रि के पावन और पवित्र पर्व पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, स्वर्णिम एरा केंद्र, बिलासपुर में चैतन्य देवियों की दिव्य, भव्य और अलौकिक झांकी का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ किया गया।
ब्रह्माकुमारीज संस्था, जो कि विश्व के 140 से अधिक देशों में अध्यात्म और राजयोग की निःस्वार्थ सेवा कर रही है, और जिसका संचालन महिला नेतृत्व द्वारा किया जाता है, उसी संस्था की बहनों द्वारा यह जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई।
इस अवसर पर माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बहन के चैतन्य स्वरूपों की जीवंत झांकी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा प्रस्तुत की गई। गहन राजयोग तपस्या के कारण वे जड़ मूर्ति के समान अचल, अडोल और शांत स्वरूप में दिखाई दीं, जिसने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से भर दिया।
ब्रह्माकुमारी स्वर्णिम एरा की मुख्य संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राखी दीदी जी का दिव्य उद्बोधन
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी स्वर्णिम एरा की मुख्य संचालिका राजयोगिनी राखी दीदी जी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा –
“माँ दुर्गा और समस्त देवियों का महत्व केवल बाह्य पूजा, अगरबत्ती और दीपक तक सीमित नहीं है। दुर्गा का अर्थ ही है – दुर्गुणों का नाश करने वाली। जब तक हम अपने अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार रूपी असुरों का नाश नहीं करेंगे, तब तक सच्ची नवरात्रि नहीं मनेगी। राजयोग की विद्या द्वारा हमें वह शक्ति प्राप्त होती है, जिससे हम अपने अंदर के सारे अवगुणों का विनाश कर सकते हैं।“
जब आत्मा रूपी बैटरी परमात्मा से कनेक्ट होकर चार्ज हो जाती है, तो शरीर रूपी यंत्र सही ढंग से काम करता है।
उन्होंने बताया कि जब हम सच्चे मन से राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करते हैं, तब हमारे भीतर की जो भी बुराइयाँ, विकार, व्यर्थ विचार और टेंशन हैं, वे स्वतः ही खत्म हो जाती हैं और हमारी सुप्त पड़ी हुई अष्ट शक्तियाँ जागृत हो जाती हैं। यही सच्चा श्रृंगार है।
राजयोग से प्राप्त होने वाली अष्ट शक्तियों का दिव्य रहस्य
दीदी जी ने विस्तार से बताया कि परमात्मा से प्राप्त होने वाली 8 शक्तियाँ ही वास्तव में माँ दुर्गा की 8 भुजाएँ हैं –
1. सामना करने की शक्ति – कैसी भी बड़ी समस्या का सामना करने की हिम्मत।
2. समेटने की शक्ति – व्यर्थ बातों को एक सेकंड में समेटकर समर्थ में लगाने की शक्ति।
3. सहन करने की शक्ति – दूसरों के कड़वे बोलों को भी सहन कर शीतल रहने की शक्ति।
4. परखने की शक्ति – सच और झूठ, अपने और पराये को परखने की शक्ति।
5. निर्णय करने की शक्ति – सही समय पर सही और श्रेष्ठ निर्णय लेने की शक्ति।
6. विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति – बड़े विस्तार को एकाग्रता में लाने की शक्ति।
7. सहयोग की शक्ति – सभी को सहयोग देने और सभी से सहयोग लेने की शक्ति।
8. समाने की शक्ति – हर बात को सागर समान अपने में समा लेने की शक्ति।
दीदी जी ने भावुक होकर कहा – “वास्तव में हर एक माँ, हर एक बहन, हर एक महिला स्वयं अष्टभुजाधारी माँ दुर्गा ही है। बस हम अपने इस देवी स्वरूप को भूल कर देह के भान में आ गए हैं। अपने उस देवी स्वरूप को पहचानने की सर्वोत्तम और सहज विधि है – राजयोग मेडिटेशन। नारी ही नारायणी है, नारी ही शक्ति का स्वरूप है।”
150 से 200 श्रद्धालुओं ने लिया लाभ और पूर्णिमा दीदी जी ने कराया अभ्यास
इस दिव्य कार्यक्रम में स्वर्णिम एरा महिला समिति की अध्यक्ष मीना शर्मा जी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इस दौरान मीना शर्मा जी को परमात्मा के घर की ईश्वरीय सौगात, पवित्र प्रसाद एवं ईश्वरीय स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानपूर्वक सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए विशेष शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद दिया गया।
लगभग 150 से 200 श्रद्धालु भाई-बहनों ने बड़ी श्रद्धा के साथ भाग लिया और पूरे कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।
उक्त कार्यक्रम में राजयोगिनी पूर्णिमा दीदी जी ने उपस्थित सभी भाई-बहनों को बहुत ही प्रेम से राजयोग मेडिटेशन का गहन अभ्यास कराया। राजयोग का अभ्यास करके सभी ने आत्मिक शांति और परम आनंद का अनुभव किया और जीवन में पवित्रता, सुख-शांति और शक्तियों को धारण करने का दृढ़ संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने ब्रह्माकुमारी बहनों का दिल से आभार व्यक्त किया।
