
चिकित्सा शिविर, भोजन-वस्त्र वितरण और सेवा कार्यों ने दिया मानवता का संदेश
“तेरे दर पर बाबा, एक अर्जी पड़ी है, उसे पढ़ लेना, बहुत जरूरी है उसे देख लेना… मैं हूं चरणों का दास तुम्हारा।”

रायपुर। देवरी स्थित पूज्य बाबा गोडड़ीवाला धाम में संत बाबा हरदासराम साहिब जी का 35वां वर्षी महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ संपन्न हुआ। तीन दिवसीय इस धार्मिक महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ पाकिस्तान के सिंध से भी श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने संत-महात्माओं के दर्शन किए, भजन-कीर्तन और सत्संग में भाग लिया तथा सेवा और परोपकार के कार्यों में सहभागी बनकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।दरबार साहिब के प्रमुख सेवादार अमर गिद्धवानी एवं विनोद चावला ने हमर संगवारी को जानकारी देते हुए बताया कि बाबा जी के 35वें वर्षी महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर अपनी श्रद्धा अर्पित की। तीन दिनों तक धाम में धार्मिक अनुष्ठानों, सत्संग, सिमरन, भजन-कीर्तन और मानव सेवा के कार्यों की अविरल धारा बहती रही। झंडा🚩 वंदनभगवान झूलेलाल जी के पूज्य बहराणा साहिब की अखंड ज्योत प्रज्वलित कर बहराणा साहब निकाल कर, कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ विश्व कल्याण की अरदासमहोत्सव के दौरान प्रतिदिन सुबह 9 बजे से देर रात तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। आरती साहिब, सत्संग, सिमरन, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अंतिम दिन रात 10 बजे श्री अखंड पाठ साहिब का भोग लगाया गया तथा विश्व कल्याण, सुख-शांति और मानवता की भलाई के लिए अरदास की गई। इसके बाद सिंधी समाज के प्रसिद्ध भगत गायकों और कलाकारों ने सिंधी एवं हिंदी भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। मधुर भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में झूमते रहे।संत राजेश कुमार जी ने दिया विश्वास, सेवा और सिमरन का संदेशअमृतवेले सुबह लगभग 4 बजे संत श्री राजेश कुमार जी सहित अन्य संत-महात्माओं ने अपनी अमृतवाणी से संगत को निहाल किया। संत राजेश कुमार जी ने कहा कि यदि जीवन में सुख चाहिए तो सबसे पहले दूसरों को सुख देना सीखें। जो बीत गया, उसे भूलकर भविष्य के लिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।उन्होंने कहा कि पैसे से सुख के साधन खरीदे जा सकते हैं, लेकिन वास्तविक सुख नहीं खरीदा जा सकता। जीवन में सतगुरु और भगवान के प्रति अटूट विश्वास होना बेहद जरूरी है। विश्वास ऐसी शक्ति है, जो चींटी को भी पहाड़ पर पहुंचा सकती है, जबकि विश्वास के अभाव में शक्तिशाली व्यक्ति भी आगे बढ़ने में कठिनाई महसूस करता है। इसलिए अपने सतगुरु पर भरोसा रखें, सेवा के साथ नाम-सिमरन करें और अहंकार को कभी अपने भीतर पनपने न दें। श्रद्धा, विनम्रता और सेवा भाव से ही जीवन सार्थक बनता है।चिकित्सा शिविर से जरूरतमंदों को मिली निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाधार्मिक आयोजन के साथ-साथ मानव सेवा को विशेष महत्व दिया गया। देश के विभिन्न शहरों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीमें पहुंचीं और निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाए गए। शिविरों में जरूरतमंदों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा आवश्यकतानुसार दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। छोटी-बड़ी बीमारियों से संबंधित जांच और परामर्श की सुविधा भी दी गई।इसके अलावा जरूरतमंदों एवं दिव्यांगजनों के लिए भोजन सेवा, जरूरतमंद परिवारों और असहाय लोगों की सहायता, अनाथों की सेवा तथा वस्त्र वितरण जैसे कार्य किए गए। दान-पुण्य और परोपकार के माध्यम से महोत्सव ने मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया।संत-महात्माओं ने बाबा हरदासराम साहिब जी के जीवन पर डाला प्रकाशदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सिंधी समाज के दरबारों के संत-महात्मा महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने बाबा हरदासराम साहिब जी के जीवन, उनकी गुरु-भक्ति, सेवा भावना और परोपकारी कार्यों का स्मरण करते हुए बताया कि सच्चे संत वही होते हैं, जो अपने जीवन को मानव सेवा और प्रभु भक्ति के लिए समर्पित कर देते हैं।बाबा हरदासराम साहिब जी ने अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलते हुए जरूरतमंदों की सहायता, समाज सेवा और भजन-कीर्तन को जीवन का आधार बनाया। उनके आशीर्वाद और प्रेरणा से देश के विभिन्न स्थानों पर दरबार स्थापित हुए, जहां आज भी धार्मिक गतिविधियों के साथ सेवा और परोपकार के कार्य किए जाते हैं। संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं से उनके बताए मार्ग पर चलने और समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का आह्वान किया।संतों का किया गया स्वागत-सम्मान, जिनमें प्रमुख है, शदाणी दरबार तीर्थ रायपुर के संत डॉ युधिष्ठिर लाल साहेब जी, संत सांई राजेश कुमार जी संत सांई लाल दास जी, संत सांई जल कुमार मसंद जी, सांई कमल कुमार जी, सन्नी सांई जी सेवादारों का रहा विशेष योगदानपूरे आयोजन का संचालन बाबा गोडड़ीवाला धाम से जुड़े प्रमुख संतों के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पुजनीय अम्मा मीरा देवी जी एवं सांई देवीदास साहब जी के मार्गदर्शन में सेवादारों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महोत्सव में पधारे सभी संत-महात्माओं का समिति की ओर से स्वागत एवं सम्मान किया गया।गोडड़ीवाला धाम महिला मंडल तथा बिलासपुर, चकरभाठा, कोरबा, तिल्दा, भाटापारा, रायपुर, दुर्ग, नागपुर, अमरावती, नासिक, मुंबई, जलगांव और रायगढ़ सहित विभिन्न शहरों से पहुंचे श्रद्धालुओं एवं युवा मंडलियों ने सेवा कार्यों में सक्रिय सहयोग दिया।सोशल मीडिया पर हुआ महोत्सव का सीधा प्रसारणतीन दिवसीय महोत्सव का सोशल मीडिया के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया, जिससे देशभर के श्रद्धालु घर बैठे धार्मिक कार्यक्रमों से जुड़ सके। बड़ी संख्या में भक्तों ने ऑनलाइन प्रसारण के माध्यम से संतों की अमृतवाणी, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का लाभ लिया।इस महोत्सव की कवरेज के लिए बिलासपुर से हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने पूरे आयोजन की कवरेज की तथा संत-महात्माओं के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।बाबा हरदासराम साहिब जी का 35वां वर्षी महोत्सव भक्ति, विश्वास, सेवा, सिमरन और मानव कल्याण के संदेश के साथ संपन्न हुआ। आयोजन ने एक बार फिर यह प्रेरणा दी कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता, दूसरों को सुख देने और निस्वार्थ सेवा करने में भी निहित है।भवदीयविजय दुसेजा
