
बिलासपुर। दीपावली पर्व को लेकर शहर में अस्थायी पटाखा बाजार लगाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार शहर के गोंड़पारा स्थित रिवर व्यू में पटाखा बाजार सजाया जाएगा। शुक्रवार को नगर निगम के सब इंजीनियर और पटवारी ने पटाखा कारोबारियों की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर नापजोख की और 136 दुकानों के लिए मार्किंग की। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, 1 नवंबर से यहां अस्थायी पटाखा बाजार शुरू हो जाएगा।पिछले वर्ष रिवर व्यू और मुंगेली नाका मैदान में पटाखा बाजार लगाया गया था, जबकि इससे पहले गवर्नमेंट स्कूल मैदान और पुलिस ग्राउंड में भी पटाखों की दुकानें लगती रही हैं। इस बार सभी 136 दुकानें गोंड़पारा स्थित रिवर व्यू में लगाए जाने की तैयारी है। बाजार शुरू होने से पहले दुकान आवंटन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कारोबारियों में गतिविधियां तेज हो गई हैं।एक दुकान लगाने में 25 से 30 हजार रुपये तक का खर्चपटाखा कारोबारियों के मुताबिक, इस वर्ष दुकान लगाने के खर्च में बढ़ोतरी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम ने शुल्क में भी 500 रुपये की वृद्धि की है। एक दुकान के लिए लगभग 6 हजार रुपये व्यवसायिक शुल्क, करीब 9 हजार रुपये निगम का किराया, 10 हजार रुपये टेंट, 2,800 रुपये बिजली खर्च और 3 हजार रुपये यूनियन शुल्क सहित अन्य मदों को मिलाकर कुल खर्च लगभग 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच रहा है।व्यापारियों के अनुसार, इस बार पटाखों की कीमतों में भी पिछले साल की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बावजूद दीपावली के अवसर पर लगने वाले इस अस्थायी बाजार में लगभग डेढ़ से दो करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। ऐसे में व्यापारियों को अच्छे व्यवसाय की उम्मीद है, लेकिन बढ़ते खर्च को लेकर उनकी चिंता भी बनी हुई है।जब शुल्क लेकर बाजार लग रहा है, तो अवैध दुकानों पर कार्रवाई क्यों नहीं?पटाखा कारोबारियों ने शहर के रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों में लगने वाली पटाखा दुकानों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब प्रशासन और नगर निगम निर्धारित शुल्क लेकर अस्थायी पटाखा बाजार संचालित कराते हैं, तो फिर घनी बस्तियों और बाजार क्षेत्रों में पटाखों की दुकानें लगाने की अनुमति कैसे दी जाती है?व्यापारियों के मुताबिक, वे हर साल इस संबंध में शिकायत करते हैं, लेकिन इसके बावजूद रिहायशी इलाकों और बाजारों में पटाखों की दुकानें संचालित होती हैं। उनका कहना है कि ऐसे स्थानों पर पटाखों की बिक्री से आगजनी और अन्य दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।व्यापारियों ने मांगी सफाई, पानी और सुरक्षा व्यवस्थाअस्थायी पटाखा बाजार में बड़ी संख्या में दुकानदारों के साथ-साथ खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए कारोबारियों ने नगर निगम और प्रशासन से बाजार में नियमित साफ-सफाई कराने, धूल पर नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव करने और पीने के पानी की व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।व्यापारियों का कहना है कि दीपावली के दौरान बाजार में भीड़ बढ़ने के साथ सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में केवल दुकानें लगाने की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बाजार को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।बाजार में स्थायी रूप से तैनात हो दमकल वाहनपटाखा बाजार में आगजनी की आशंका को देखते हुए व्यापारियों ने दमकल वाहन की व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। कारोबारियों के अनुसार, जब से फायर ब्रिगेड की व्यवस्था नगर सेना के पास गई है, तब से इतने बड़े और संवेदनशील पटाखा बाजार में दमकल वाहन की नियमित तैनाती को लेकर परेशानी हो रही है।व्यापारियों का कहना है कि जब भी दमकल की मांग की जाती है, तो आग लगने की स्थिति में वाहन उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। उनका सवाल है कि जब दुर्घटना होने के बाद दमकल पहुंचेगा, तब तक नुकसान हो सकता है। इसलिए बाजार में पूरे समय दमकल वाहन की तैनाती की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत मिल सके।प्रशासन के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौतीदीपावली पर पटाखा बाजार में हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देना जरूरी है। 136 दुकानों वाले इस बाजार में अग्निशमन वाहन, पर्याप्त पानी, साफ-सफाई, सुरक्षित आवागमन और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जानी चाहिए।व्यापारियों की मांग है कि नगर निगम और जिला प्रशासन बाजार शुरू होने से पहले सभी आवश्यक इंतजाम पूरे करें। साथ ही, शहर के अन्य क्षेत्रों में संचालित पटाखा दुकानों की भी जांच की जाए, ताकि नियमों का पालन हो और दीपावली का त्योहार व्यापारियों तथा आम नागरिकों के लिए सुरक्षित और खुशहाल बन सके
