
कचरा डंप और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था न होने से पलायन को मजबूर व्यापारी!बिलासपुर। बिलासपुर शहर को प्रदेश की ‘न्यायधानी’ कहा जाता है, लेकिन शहर के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र ‘व्यापार विहार’ के व्यापारी आज स्वयं न्याय के लिए तरस रहे हैं। सुविधाओं के अभाव, कचरे के अंबार और ट्रांसपोर्ट नगर व्यवस्था न होने के कारण व्यापार विहार का व्यापार पूरी तरह चौपट होने की कगार पर पहुँच चुका है।व्यापार विहार के वरिष्ठ व्यापारी श्री कैलाश मलघानी ने शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, “व्यापार विहार में पिछले 20 वर्षों से कचरा डंप किया जा रहा था। कड़ी मशक्कत के बाद जब यह डंपिंग बंद हुई, तो अब प्रशासन की लापरवाही के कारण यहाँ दोबारा कचरा फेंका जाने लगा है। सीसी रोड से मिली थी संजीवनी, पर ट्रांसपोर्ट न होने से सांसें फुलींश्री मलघानी ने याद दिलाया कि विधायक अमर अग्रवाल ने व्यापार विहार में सीसी रोड का निर्माण करवाकर दम तोड़ते व्यापार में नई जान फूँकी थी। लेकिन आज स्थिति यह है कि व्यवस्थित ट्रांसपोर्ट व्यवस्था न होने के कारण व्यापार पूरी तरह ठप पड़ा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “अब कोई भगवान बनकर ही आ जाए, जो व्यापार विहार में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बनवा सके! यदि यही आलम रहा तो व्यापारी धीरे-धीरे पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे। जब व्यापारी ही नहीं रहेंगे, तो व्यापार विहार का अस्तित्व कैसे बचेगा?”रेलवे माल गोदाम की दूरी बढ़ा रही लागत और समयव्यापारियों का कहना है कि रेलवे का माल गोदाम व्यापार विहार के पास या उससे सीधे जुड़ा होना चाहिए था। यदि ऐसा होता तो व्यापारियों को रेलवे ट्रांसपोर्ट से माल मंगवाने और भेजने में सीधी सहूलियत मिलती, परिवहन लागत घटती और समय की भी भारी बचत होती। परंतु, माल गोदाम दूर होने के कारण सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है।आखिर इस दुर्दशा का जिम्मेदार कौन?व्यापारियों ने तीखा सवाल उठाते हुए पूछा है कि:करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले व्यापारिक क्षेत्र की लगातार उपेक्षा क्यों की जा रही है?न्यायधानी के नाम पर व्यापारियों को बुनियादी सुविधाएं देने के बजाय उनका शोषण और उपेक्षा क्यों की जा रही है?
