
देवी की आठ भुजाएं जीवन की आठ शक्तियों का प्रतीक
फलदार वृक्ष, तीन गुड़ियों और कछुए के दृष्टांत से समझाया अष्ट शक्तियों का महत्व
बिलासपुर राज किशोर नगर : देवी-देवताओं की आठ भुजाएं जीवन में काम आने वाली आठ दिव्य शक्तियों की प्रतीक हैं। सहन करना, समाना, परखना, निर्णय लेना, सामना करना, सहयोग देना, विस्तार को समेटना और श्रेष्ठ संस्कारों को समेटना—इन शक्तियों को अपनाकर व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी संतुलित रह सकता है। यह बात बीके गायत्री बहन ने राज किशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में चल रहे सात दिवसीय राजयोग ध्यान शिविर में कही।
सहन और समाने की शक्ति : फलदार वृक्ष पत्थर खाने के बाद भी मीठे फल देता है। इसी तरह दूसरों की कटु बातों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय धैर्य रखना सहन करने की शक्ति है। तीन गुड़ियों के दृष्टांत से उन्होंने समझाया कि हर सुनी हुई बात को आगे बढ़ाने के बजाय व्यर्थ बातों को छोड़ना और उपयोगी बातों को आत्मसात करना समाने की शक्ति है।
परखने और निर्णय की शक्ति : जैसे पारखी हीरे का वास्तविक मूल्य पहचानता है, वैसे ही व्यक्ति को सही-गलत और उपयोगी-व्यर्थ में अंतर करना चाहिए। शांत मन से परिस्थितियों को समझकर सही समय पर उचित निर्णय लेना जीवन की महत्वपूर्ण कला है।
सामना और सहयोग की शक्ति : कठिनाइयों में धैर्य और साहस बनाए रखना सामना करने की शक्ति है। गोवर्धन पर्वत उठाने में ग्वाल-बालों के सहयोग और आग बुझाने के लिए चोंच में पानी लाने वाली चिड़िया के दृष्टांत से उन्होंने बताया कि किसी श्रेष्ठ कार्य में छोटा-सा योगदान भी महत्वपूर्ण होता है।
विस्तार और श्रेष्ठ संस्कारों को समेटने की शक्ति : कछुए की तरह जरूरत पड़ने पर अंतर्मुखी होकर मन को व्यर्थ विचारों से हटाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जीवन की यात्रा में धन-संपत्ति से अधिक महत्व श्रेष्ठ कर्मों और संस्कारों का है। इसलिए हर दिन अपने गुणों को निखारने का प्रयास करना चाहिए।
बीके गायत्री बहन ने कहा कि राजयोग ध्यान से मन को शांत कर इन शक्तियों को व्यवहार में लाने का अभ्यास किया जा सकता है।
