श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन 18 सितंबर से 24 सितंबर तक श्री श्याम मंदिर परिसर स्थित सिटी कोतवाली के पास बिलासपुर में किया जा रहा है कथा वाचक आचार्य श्री राधेश गौतम जी जयपुर के द्वारा अपनी अमृतवाणी में भक्तजनों को कथा रस पान करा रहे हैं कथा के तीसरे दिन व्यास पीठ में बैठे आचार्य श्री राधेश जी ने अपनी अमृतवाणी में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन सती चरित्र ध्रुव चरित्र भगवान नरसिंह अवतार की कथा सुनाई भक्त जब भी मुश्किल में हो और भगवान को याद करता है तब भगवान कोई भी अवतार लेकर उसकी रक्षा के लिए पहुंच जाते हैं या भक्त भगवान को याद करें तब भी भगवान कहीं पर भी हो उसे भक्त के पास पहुंच जाते हैं बस भाव और भक्ति सच्ची होनी चाहिए फिर अपने आप ही आत्मा का और परमात्मा का मिलन हो जाता है अपने आप ही दिल के तार भगवान के से जुड़ जाते हैं और भक्त को हर इंसान में हर जगह भगवान ही नजर आते हैं जैसे भक्त प्रहलाद को हर जगह श्री हरी श्री हरि के दर्शन होते थे और इस बात को साबित करने के लिए जब उन्होंने अपने पिता से कहा कि इस खंबे में भी मुझे श्री हरि नजर आ रहे हैं उसके पिता ने गदृद्वे से जब खंबे को तोड़ा तो साक्षात भगवान विष्णु देव जी ने नरसिंह अवतार लेकर खंभे से बाहर निकले भक्त की एक पुकार सुनकर वह उसकी बात को सही साबित करने के लिए
भक्त की कोई भी बात कही गई झूठी नहीं होती और भगवान उसे सत्य साबित करते हैं भक्त ध्रुव ने भी कड़ी तपस्या करके भगवान को प्रसन्न किया वह दर्शन पाए श्रीमद् भागवत कथा सिर्फ एक कथा नहीं है या एक ग्रंथ ना समझ यह संपूर्ण जीवन का सार है भक्ति का रस है और साथ-साथ इसमें भगवान श्री कृष्ण का वास है बस जरूरत है इस कथा का भक्ति से रसपान करने का फिर आपको भी इस हाल में हर जगह भगवान विष्णु के भगवान कृष्ण के दर्शन होंगे दिखाई देंगे ईस नेत्रों से दिखाई नहीं देंगे बल्कि आपको भक्ति वाली आंखें चाहिए जब आप सच्चे मन से भाव से कथा का रसपान करेंगे और अपने तन और मन को कथा में लगा देंगे तब आपकी आंखें भी भक्ति वाली आंखें बन जाएगी
और फिर आपको किसी और चीज की जरूरत ही नहीं पड़ेगी क्योंकि प्रत्यक्ष भगवान के दर्शन आपको प्राप्त हो जाएंगे अपनी मधुर आवाज में भजन गाए जिसे सुनकर भक्तजन भाव विभोर हो गए वह झूम उठे कथा दोपहर 3:00 बजे आरंभ हुई संध्या 7:00 बजे समापन हुई आखिर में आरती की गई प्रसाद वितरण किया गया आए हुए सभी श्रृद्धालुऔ के लिए भंडारे का आयोजन किया गया बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारा ग्रहण किया वह अपने मन व तन को तृप्त किया आज के इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में समस्त जिंदल परिवार के सदस्यों का विशेष रहा