वैसे देश भर में दो बातें हमेशा चर्चा में रहती है एक राजनीतिक दूसरी क्रिकेट और अभी वर्ल्ड कप भारत में चल रहा हैं उसके रोमांचक मैच खेले जा रहे हैं, और क्रिकेट वर्ल्ड कप की पूर्व विजेता इंग्लैंड की टीम को नौसीखिए टीमो से हार का सामना करना पड़ रहा है !जिसकी किसी को कल्पना नहीं थी की इस बार इंग्लैंड भारत में हो रहे वर्ल्ड कप क्रिकेट के वह सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंच पाई, इसी तरह राजनीतिक में भी कब क्या हो जाए कुछ कहा जा नहीं सकता? अभी हाल ही में हो रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी ऐसा ही खेल हो रहा है हर राज्य में अपने-अपने हिसाब से राजनीतिक खेली जा रही है पर इन सब के बीच सब की नजरे छत्तीसगढ़ पर लगी हुई हैं क्योंकि यहां हर दिन हर पल कुछ ना कुछ ऐसे घटनाक्रम घट रहे हैं जिससे राजनीतिक किस करवट बैठेगी कहा नहीं जा सकता है हाल ही में कुछ घटनाओं ने ऐसे नया मोड़ ले लिया की कांग्रेस की ओर एकतरफा चलने वाली लहर रुक गई जैसे ही महादेव सट्टा एप के मालिक के खुलाशे ने भूचाल ला दिया और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा कर दिया दूसरी घटना बिलासपुर में घटी बेलतरा क्षेत्र के पूर्व विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण तिवारी ने मीडिया में जो ऑडियो रिलीज किया।
उससे बिलासपुर के महापौर की कुर्सी खतरे में पड़ गई है उन्होंने एक ही गेंद पर उन्हें बोल्ड कर दिया। वैसे अरुण तिवारी बहुत चतुर राजनीति के खिलाड़ी हैं 2018 में भी उन्होंने( सेठ तो गयो) का नारा देकर सेठ को विदाई दिलवा दी। जनता ने उन्हें हरा दिया पर इन सब के पीछे इस नारे का बहुत बड़ा महत्व था। ठीक 5 साल के बाद टिकट के आस में बैठे अरुण तिवारी को टिकट नहीं मिला और अपनी और महापोर से हुई बातचीत के ऑडियो को रिलीज करके उन्होंने राजनीतिक में नया भूचाल ला दिया महापौर को पार्टी ने निलंबित कर दिया रातों-रात खेल बदल गया अब यह घटना जो घटी है इसका फायदा किसे मिलेगा वह किसे नुकसान होगा यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा पर एक बात जरूर है इस बार भी विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने कुछ नया करके दिखा दिया और एक चतुर मजें हुए राजनीति की तरह खेल,खेल दिया, इससे दो बातें तो साफ होती है अब लोग किस पर भरोसा करें और किस पर ना करें अब लोग फोन पर बात करने पर भी डरेंगे या अपनी मन की बात दिल की बात नहीं करेंगे कोई अपना हाल-चाल भी नहीं सुनाएगा क्या यह सब करना उचित था? पर कहते हैं ना कि राजनीतिक में और जंग में सब चलता है।
पर इसका असर आम जनता पर कितना पड़ेगा यह तो समय ही बताएगा यह चुनाव अब बहुत महत्वपूर्ण पोजीशन पर पहुंच गया है कौन डबल दीवाली मनाएगा यह तो 3 दिसंबर को ही पता चलेगा जनता भी शांत है दिवाली के बाद ठंड भी बढ़ेगी और चुनावी गर्मी भी बढ़ेगी पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के द्वारा जनसंपर्क वह प्रचार में तेजी आ गई है रोड शो हो रहे हैं बड़े-बड़े नेता पहुंच रहे हैं अब देखना यह है कि इस बार, सेठ चुनाव जीतता है या वर्तमान विधायक शैलेश पांडे अपनी ईमानदारी सादगीपूर्ण मिलन सार से जनता का दिल जीतकर एवं अपने कार्यकाल में किए गए विकास के बल पर क्या जनता उन्हें विधानसभा भेजती है ? यह अब समय ही गर्त में है और वह आने वाले 3 दिसंबर को ही पता चलेगा।