बिलासपुर शासकीय प्राथमिक शाला भूरीभाटा विकासखंड बिल्हा जलसो का मामला प्रबंधन को शायद बच्चों की पढ़ाई की चिंता नहीं है। इस स्कूल में कक्षा पहली से पांचवी तक की 64 बच्चे हैं पहली से लेकर तीसरी तक कक्षाएं एक ही रूम में संचालित होती हैं और चौथी और पांचवा की कक्षाएं दूसरे रूम में एक साथ संचालित होती है । दो टीचरों के भरोसे स्कूल चल रहा है।बच्चों की शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता माना जाय तो स्कूल के नाम पर महज खानापूर्ति है
स्कूल की मरम्मत के लिए भी प्रबंध गंभीर नहीं है। मुख्य द्वार बाउंड्री वाल टुटी होने कारण इस मार्ग पर आने जाने वाले वाहनों के कारण बच्चों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है।
एक टीचर पहली से लेकर तीसरी तक एक साथ बच्चों की क्लास में पढ़ाई करवा रही है दूसरे रूम में चौथी और पांचवी के बच्चे एक साथ पढ़ाई करते हैं ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे हो पाएगी जब हमर संगवारी की टीम पहुंची सब बच्चे खेल रहे थे दोपहर का समय हुआ है लंच हुआ है उसके बाद बच्चे जब रूम में गए और टीचर से बातचीत की गई तो उन्होंने जानकारी दी टोटल 64 बच्चे हैं पहली से लेकर तीसरी तक एक ही क्लास में एक साथ पढ़ाई होती है और चौथी और पांचवी की दूसरी क्लास में पढ़ाई होती है मात्र दो टीचर है जब पांचवी के बच्चे को बुलाकर बोला गया 10 × 10 बराबर कितना होता है लिखकर बताओ तो एक बच्चे ने 70 लिखा दूसरे बच्चे ने 20 लिखा और यह सब स्कूल के टीचर के सामने की बात है जब पांचवी के बच्चे को 10 × 10 कितना होता है यह पता नहीं है तो वह आगे कैसे पढ़ाई कर पाएगा दूसरे स्कूल में जाएगा तो कैसे उसका एडमिशन कैसे हो गा ।शहर से लगे हुए स्कूल की जब हालत ऐसी है तो बाकी स्कूलों की हालत कैसी होगी सब भगवान भरोसे चल रहा है लगता है सब कोई सिर्फ खाना पूर्ति करने के लिए ही स्कूल जाते हैं ।
प्राचार्य का रूम धूल मिट्टी पटा हुआ था महात्मा गांधी राधा कृष्ण की फोटो पर पुरानी माला चढ़ी हुई पड़ी थी जो कई महीनो से उतरी नहीं गई थी कोई साफ सफाई नहीं थी सब आया राम गया राम जैसे काम हो रहा था एक तरफ सरकार बच्चों को प्राइवेट स्कूल की शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है और कई स्कूलों को ज्ञानदेव स्कूल बनाना चाहती है दूसरी और गांव के स्कूल की ऐसी हालत देखकर कौन माता-पिता चाहेंगे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजना इससे बच्चों का भविष्य खतरे में है और टीचरों को सिर्फ अपनी तनख्वाह से मतलब है बच्चों की पढ़ाई से नहीं ऐसा लगता है की टिचर भी पढ़ा लिखा है कि नहीं कहीं उसने भी कुछ ले – देकर सरकारी नौकरी प्राप्त कर ली है कया? हमारे कल का भविष्य हमारे बच्चे कैसे आगे बढ़ेंगे कैसे प्राइवेट स्कूलों के बच्चों का सामना करेंगे शासन को इस और भी ध्यान देने की महती आवश्यकता है