हम जीते जी कई दान कर सकते और मृत्यु के उपरांत परिवार वाले नेत्रदान कर किसी जीवन को रोशन कर सकते हैं। लगातार सरकार व सामाजिक संस्थाओं के द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है जिसके परिणाम स्वरूप स्वर्गीय जय रामदास मोटवानी जी के धर्मपत्नी शांति देवी का निधन होने पर उनके परिवार के सदस्यों ने नेत्रदान की इच्छा जाहीर की
ओर भरत चावला ने कदम संस्था से संपर्क किया जिससे सिम्स के अमित ,संजय व कदम संस्था के सदस्य सुनील तोलानी, पवन आडवाणी के सहयोग से सफलतापूर्वक नेत्रदान किया गया
नेत्रदान मृत्यु के 6 घंटे के अंदर किया जाता है यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा क्योंकि बिलासपुर रायपुर शहर में सबसे ज्यादा नेत्रदान संधि समाज के द्वारा किया जा रहा है कई सामाजिक संस्थाओं का अभियान है जिसमें न केवल शहर बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी जागरूकता आ रही है।
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