बिलासपुर -: सिंधी समाज के वरिष्ठ समाजसेवी स्वर्गीय श्री देवीदास जी वाधवानी के हैदराबाद में इलाज के दौरान हुए असामयिक निधन पर अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए।
समाज के वरिष्ठ रूपचंद डोडवानी ने कहा कि..
संसार प्रकृति के नियमों के अधीन है एवं मानव जीवन एक साधना इस जीवन यात्रा में जो कुछ व्यक्ति अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाते हैं उनमें एक थे स्वर्गीय श्री देवीदास जी वाधवानी जिन्होंने राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर रहने के साथ अनेक सामाजिक, व्यवसायिक एवं धार्मिक संगठनों में भी अनेक महत्वपूर्ण पदों पर लम्बे समय से आसीन रहे जिसमें प्रमुख रूप से पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर के पूर्व अध्यक्ष, एवं संरक्षक, श्री झूलेलाल सेवा समिति (झुलेलाल मंगलम) के पूर्व अध्यक्ष, बिलासपुर मर्चेंट एसोसिएशन व्यापार विहार के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान संरक्षक, छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के संरक्षक, छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख सलाहकार, एंव धार्मिक संस्थाओं में उच्च पदों पर आसीन होने के साथ ही उनकी महत्वपूर्ण सहभागिता रही, उनके दुखद निधन से पूरे समाज एवं व्यापारी जगत के साथ ही धार्मिक संगठनों में भी गहन शोक की लहर छा गई है।
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उनकी सदैव शुभ कार्यों मानव सेवा परिवार,धर्म सेवा ,संत सेवा में भी उनकी लगन रही।
स्व: श्री देवीदास जी वाधवानी ऊर्जावन, स्फूर्तिवान हंसमुख मिलनसार ,विचारवान होने के साथ- उनके व्यक्तित्व में प्रबुधता एवं सादगी भी झलकती थी। उनका असामयिक स्वर्गारोहण मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।
वे सिन्धी समाज के साथ ही सभी समाजों में लोकप्रिय थे उन्हें सभी समाजों मे आदर एवं सम्मान के साथ देखा जाता था।
उन्हें भुलाया नहीं जा सकता, उनके अच्छे कार्यों की छाप सदैव हमारे जेहन में रहेगी।
परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि दिव्य पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान बक्क्षे एवं समस्त वाधवानी परिवार, नाते रिश्तेदारों इष्ट मित्रों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें!!
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स्वर्गीय श्री देवी दास वाधवानी जी के द्वारा कुछ समय पूर्व ही जीते जी रक्तदान मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लेते हुवे हैंड्स क्लब में अपने नेत्रदान का संकल्प पत्र भरा था जिन्हें उनके सुपुत्रों श्री अंकित वाधवानी एवं शिरीन वाधवानी के द्वारा हैदराबाद में इलाज के दौरान अपने पिता स्वर्गीय श्री देवी दास जी वाधवानी के आकस्मिक निधन के आघात के बावजूद, अपने पिता की अंतिम इच्छा को पूर्ण करते हुए उनका हैदराबाद में नेत्रदान कराया गया जिससे जाते-जाते भी स्वर्गीय श्री देवीदास जी वाधवानी दो लोगों के जीवन मे रोशनी कर गए।
इस पुनीत कार्य के लिए लिए उनके सुपुत्रों एवं समस्त वाधवानी परिवार को बहुत-बहुत साधुवाद एवं नमन
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