बिलासपुर नगर की सामाजिक संस्था ममतामयी माँ👩 कलावती दुसेजा फाउंडेशन के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री सतराम दास सिदारा के द्वारा अपने पुत्र स्वर्गीय नंदकिशोर सिदारा की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर आज मानसिक दिव्यांग डीपूपारा स्थित आश्रम घरौंदा में खाद्य सामग्री व सुखा राशन प्रदान किया गया, खाद्य सामग्री में केक 🎂 बिस्किट, एक कार्टून फ्रूटी, चिप्स, कुरकुरे, शीतल जल व अन्य सामाग्री सुखा राशन, दाल ,चावल तेल आदि अनेक जीवनोपयोगी सामाग्री भेंट की गई इस अवसर पर महेश सिदारा ने बताया कि विगत चार वर्षो से अपने भाई की पुण्यतिथि पर वह सेवा कार्य करते हैं व गुरुद्वारे तथा मंदिर में जाकर उनकी आत्मा की शांति लिए प्रार्थना भी करते हैं करोना काल के समय उनके भाई का स्वर्गवास हो गया था
इसीलिए हर वर्ष आज भी हम
सिंधी गुरुद्वारा जाकर अरदास करवाते हैं ,चार वर्षो से जैसे उन्हें जानकारी होने पर यहाँ पर आश्रम है व मानसिक तौर पर दिव्यांग महिलाए रहती हैं तो हम प्रतिवर्ष यहाँ पर आते हैं व खाद्य सामग्री और राशन आदि यहां पर प्रदान करके जाते हैं शहर में तो वैसे अनेक आश्रम है किंतु हमारा उद्देश्य यही है कि जहां कम लोगों को ज्ञात हो जहां कम सहायता पहुंचती हो वहां पर सहायता मिले और जरूरत मंद को सहायता मिले, समान मिले जिससे वह इस वस्तुओं का उपयोग कर सके और उनकी आत्मा तृप्त होगी उन्हें खुशी मिलेगी तभी हमारा जोयह कार्य है सफल होगा इन्हीं बात को सब देखते हुए जैसे ही हमे जानकारी मिली कि यहां पर एक ऐसा आश्रम है तो हम प्रतिवर्ष यहां आते हैं और सेवा कार्य करते हैं हमारे पिताजी सतराम दास जी बिलासपुर नगर के समाजसेवी भी हैं सफल व्यवसाई भी हैं और धार्मिक प्रतीक वाले व्यक्तित्व हैं धर्म कर्म उन्हें हमारे दादाजी से विरासत में मिला हुआ है धर्म की बातें,करना, धर्म करना पूजा पाठ करना, मंदिर में जाना यह सब हमारे दादा जी ने पिताजी को सिखाया है इस तरह पिताजी ने भी वही गुण हमें भी दिए हैं हमें भी एक शिक्षा प्रदान की है हमेशा सत्य के राह पर चलो सबका भला करो और दीन दुखियों की सेवा करो जैसे ममता मयी माँ कलावती दुसेजा फाउंडेशन का एक स्लोगन है
( सेवा ही परमों धर्म )
उस चीज को हम भी अमल करते हैं और सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म मानते हैं आज की सेवा कार्य में इनका सहयोग रहा सतराम दास सिदारा, महेश सिदारा, विजय दुसेजा,
गोविंद दुसेजा, ब्रह्मानंद ,डब्बू ,रोशनी पप्पू ,लव,सुरेश सिदारा का विशेष सहयोग रहा
भवदीय
विजय दुसेजा
