त्योहार उमंग और उत्साह और ख़ुशियों का स्वरूप है ऐसा ही पर्व है सिंधी समाज का थदडी
बिलासपुर:- रविवार को सिंधी समाज ने थादडी पर्व मनाया थदडी शब्द का अर्थ है ठंडा शीतल ।इस पर्व में एक दिन पहले ही हर सिंधी परिवार के घरों में तरह तरह के व्यंजन बनाए जाते है जैसे कूपड़ गच कोकी सुखी तली हुई सब्ज़िया भिंडी करेला आलू रायता मखन आदि रात को सोने से पूर्व चूल्हे पर जल छिड़ककर हाथ जोड़कर पूजा की जाती है इस तरह चूल्हा ठंडा किया जाता है और दूसरे दिन पूरे दिन चूल्हा नहीं जलता और एक दिन पहले का बना ठंडा खाना खाया जाता है शनीचरी पड़ाव स्थित भाई वरीयाराम दरबार में पहुंचकर समाज की महिलाओं ने विधि विधान के साथ
शीतला माता की विधिवत पूजा कर
कथा सुनी ओर
परिवार और बच्चो की सुख शांति स्मृद्धि की कामना करते दुआ माँगी जाती है कि वें शीतल रहे और माता का आशीर्वाद बना रहे यह पर्व कृष्ण जन्मष्टमी के एक दिन पहले आता है इस वर्ष 25 अगस्त रविवार को सिंधी समाज ने यह पर्व धूमधाम से मनाया
गया बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं उपस्थित रहे जिनमें प्रमुख हैं
मिना सिदारा कोमल वाधवानी गुंजन दुसेजा, भारती दुसेजा, भावना सिदारा, लक्ष्मी वाधवानी ,नीलम,वषोॅ,पलक सिदारा,ट्रिकंल अडवाणी, नीलम सिदारा,रांखी, कृति सिदारा,
भवदीय
विजय दुसेजा
