बिलासपुर:- श्री झूलेलाल चालिहा महोत्सव का आयोजन गली नंबर 3 तेलीबांधा थावानी परिवार के द्वारा किया गया समापन के पूर्व संध्या पर सेहरा गाँव गोधरा गुजरात की संत सांई सेहरा वाले जी का दिव्य सत्संग कार्यक्रम तेलीबांधा गली नंबर 5 सिंधी धर्मशाला में आयोजित किया गया कार्यक्रम के पूर्व गली नंबर 3 से सांई जी की भव्य शोभायात्रा ढोल बाजे के साथ निकाली गई जो कि नगर भ्रमण करते हुए भगवान झूलेलाल जी के मंदिर पहुंचे सांई जी के द्वारा भगवान झूलेलाल जी की मूर्ति पर फुलो कि माला पहनाकर पूजा अर्चना की गई जगह-जगह सांई जी का भक्तों के द्वारा वह पूज्य सिंधी पंचायत तेलीबांधा के द्वारा फूलों की वर्षा करके फूलों की माला पहनाकर भव्य आतिशबाजी करके स्वागत सत्कार सम्मान किया गया भक्तों के द्वारा भक्ति भरे भजनों पर नृत्य करते हुए चल रहे थे यात्रा सिंधी धर्मशाला पहुंच कर समापन हुई यहां पर छत्तीसगढ़ पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष महेश दरयानी जी के तत्वाधान में सांई जी का स्वागत सत्कार किया गया महिलाओं के द्वारा फूलों की वर्षा की गई आरती उतारी गई कार्यक्रम की शुरूआत भगवान झूलेलाल जी की बड़ी मूर्ति पर फूलों की माला पहनाकर दीप प्रज्वलित कर पूज्य बहराणा साहब कि अखंड ज्योत जला कर कि गई ,
कटारिया बंधु के द्वारा भक्ति मय भजनों की शानदार प्रस्तुति दी अब वह घड़ी आ गई जिसका रायपुर वासियों को बेसब्री से इंतजार था सांई जी के अमृतवाणी में सत्संग का रसपान करने का सांई जी ने अपने अमृतवाणी में भगवान झूलेलाल के चालिहा महोत्सव की महिमा बताइ भगवान झूलेलाल जी का जन्म क्यों हुआ था इसके बारे में बताया उन्होंने एक प्रसंग सुनाया जिस तरह किसी भी बिल्डिंग को खड़ा किया जाता है तो उसके चार पिलर मजबूत होते हैं तभी बिल्डिंग खडी रहती है अगर एक भी पिलर कमजोर हुआ तो बिल्डिंग गिर जाएगी इसी तरह सिंधी समाज भी चार स्तंभों पर खड़ा हुआ है अगर एक भी गिरा तो धराशाई हो जाएगा पहला पिलर है भगवान झूलेलाल उसे कभी ना भूले हमें बचाने के लिए हमारे धर्म की रक्षा के लिए संनातन धर्म के लिए ” और हमने उन्हें बुलाया तभी वह आए थे और हमारी रक्षा की मिरक शाह बाशाह से,,,,
हमारी पहचान
भगवान झूलेलाल से है जीस तरह बच्चों की पहचान उसके पिता से होती है उसी तरह सिंधी समाज की पहचान उसके आराध्य देव भगवान झूलेलाल से है यह मजबूत पिलर है इस बिल्डिंग को बांधे रखा है इसी तरह उन्होंने एक-एक करके चार पिलर की व्याख्या की जैसे गुरु ,माता-पिता ,गुरु के बिना जीवन अधूरा है गुरु अगर ना रहे तो आपको ज्ञान की प्राप्ति कहां से होगी मोक्ष की प्राप्ति कहां से होगी गुरु ही के माध्यम से आप भगवान को प्राप्त कर सकते हैं तो गुरु का भी बहुत बड़ा महत्व है वह भी एक मजबूत पिलर है और बिना माता-पिता के आपकी उत्पत्ति नहीं हो सकती है जीवन में सब कुछ दोबारा मिल जाएगा पर माता-पिता दोबारा नहीं मिलेंगे इसलिए उनका भी सम्मान करें वह जितना हो सके उनकी सेवा करें
अपने तीज त्यौहार अपनी संस्कृति अपनी बोली अपनी भाषा को कभी ना भूले बल्कि उनका सम्मान करें घर में हो या बाहर में हो सुख में हो या दुख में हो अपनी भाषा को कभी न भूले अपनी भाषा का उपयोग जीतना ज्यादा करेंगे उतना ज्यादा आप आगे बढ़ेंगे आने वाली पिढी को भी जरूरी है अपनी भाषा का ज्ञान होना हमारी पहचान हमारी बोली भाषा से ही ज्यादा होती है,
सांई जी ने एक प्रसंग सुनाया एक बार भगवान झूलेलाल जी ने सभी भक्तों से परीक्षा लेने के लिए सभी को सुबह सिंधु नदी के किनारे बुलाया और अब कहा की भाई जो मेरा सच्चा भक्त है वह मेरे साथ जाना चाहता है वह आगे आए चले सभी चुप हो गए शांत हो गए किसने भी कुछ नहीं कहा पर संत पूगर ने कहा भगवान झूलेलाल जी मैं आपके साथ चलूंगा भगवान झूलेलाल जी ने उनका हाथ पकड़ कर सिंधु नदी की और ले चले जैसे पहली सीढ़ी कदम रखा तो बच्चे दिखाई देने लगे दुसरी सीढ़ी पर कदम रखा माता-पिता दिखाई देने लगे ऐसे करते हुए आगे बढ़ते गए पानी धीरे-धीरे ऊपर बढ़ता गया जब पानी सर तक पहुंचा तो वह सोचने लगा कि भगवान झूलेलाल जी मेरे से परीक्षा ले रहे हैं अब सच में मुझे अपने साथ लेकर जाएंगे पर कोई बात नहीं यह जीवन भी उनका दिया हुआ है जैसा वह चाहे भगवान झूलेलाल जी संत पूगर के हाथ ✋को पकड़ कर सिंधु नदी में बिच में पहुंचकर अंतर ध्यान हो गए नीचे पानी के अंदर चलते गए पूगर ने सोचा पूरा अंधेरा है लगा कि अब मैं मर गया पर भगवान झूलेलाल जी ने उनके सिर पर हाथ रखा तो लगा कि मैं अभी जिंदा हूं मरा नहीं हूं और मुझे कोई तकलीफ भी नहीं हो रही है आखिर नीचे तक पहुंच गए नीचे पहुंचने के बाद देखा सुंदर सफेद मंदिर है संत पूगर ने सोचा कि मैं मर गया हूं और स्वर्ग में पहुंच गया हूं झूलेलाल जी ने कहा तुम मरे नही हो जिंदा हो , मंदिर लेकर गए भगवान झूलेलाल आराम करने लगे संत पूगर उनकी सेवा करने लगा ओर सोचने लगा की
मैं जिंदा हूं तो फिर वापस कब चलेंगे ऐसे सोचते हुए कुछ समय बीत गया तब भगवान झूलेलाल ने संत पूगर को कहा पल्लव पाए और भगवान झूलेलाल जी ने 7 वस्तुएं दि और पूगर को भगवान झूलेलाल जी ने हाथ पकड़ कर सिंधु नदी से बाहर निकले सारी संगत बाहर खड़ी देख रही थी और हैरान हो गई कहीं हम सपना थोड़ी देख रहे हैं भगवान झूलेलाल जी संत पूगर को हाथ पकड़ के बाहर लेकर आए और कहा की मैं आप सभी की परीक्षा ले रहा था कि कौन मेरा सच्चा भक्त है इसमें संत पुगर अपनी परीक्षा में सफल हुआ इसीलिए एक बात हमेशा याद रखें जब भी गुरु, व माता-पिता कुछ कहें तो उन्हें मना ना करें बल्कि जैसा वह कहते हैं वैसा करें कभी-कभी वह भी परीक्षा लेते हैं कि हमारा शिक्षय हमारा 👱बेटा कितना मजबूत है और पक्का है और वह कभी अपनी औलाद को अपने शिक्षय को गीराएगे नहीं बल्कि ऊंचाइयों तक ले जाएंगे अच्छे कर्म की ओर ले जाएंगे भगवान झूलेलाल जी ने तो सात वस्तुएं दी थी उसके बारे में एक-एक करके विस्तार से सांई जी ने साध संगत को बताया
और कहां बड़े भाग्यशाली हो कि आपको मानव जीवन मिला है सर्वश्रेष्ठ अगर योनी है तो वह मानव जीवन है चोरासी लाख योनियों के बाद मानव जीवन मिलता है उसे यूं ही व्यथ बर्बाद ना करें जब भी समय मिले सत्संग कीर्तन में जरूर आए और जरूर सुने और सुनकर जितना हो सके उस पर अमल करें तभी इसका लाभ आपको मिलेगा और यह जीवन का भी उद्धार होगा सत्संग में आश जी मटकी की महिमा बताई गई
छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के कार्यकारी अध्यक्ष महेश रोहरा ने समाज में एकता के लिए जागृति लाए वह कहा हिंदू धर्म की रक्षा के लिए सभी सनातन धर्म के लोग एक हो जाए अपने धर्म के प्रति वफादारी करे और समाज में एक दूसरे को ऊपर उठाने के लिए सहयोग करे हमारे पूर्वजों ने अपना वतन छोड़ा 🏠 घर छोड़ा धन दौलत छोड़ी पर अपने धर्म को नहीं छोड़ा धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने सब कुछ बलिदान दे दिया उनके बलिदान को व्यर्थ जाने नहीं देना है सभी को मिल जुलकर एक होकर समाज को आगे बढ़ाना है और मजबूत बनाना है छोटे को प्यार करना है बड़ों का सम्मान करना है, आज कुछ परिवार के लोग अन्य धर्म अपना रहे हैं अन्य धर्म में शादी कर रहे हैं जो कि सरासर गलत है अपना धर्म सबसे सर्वश्रेष्ठ धर्म है और अपने धर्म को छोड़कर अगर आप अन्य धर्म अपनाते हैं तो आपको कभी मोक्ष नहीं मिलेगा अपने बच्चों को यह शिक्षा जरूर दे कि अपने धर्म में ही रहकर हम अपने बड़ों का मान सम्मान बलिदान को बचा सकते हैं और सनातन धर्म से बड़ा कोई दूसरा धर्म नहीं है किसी के बहकावे में ना आए हाल की जो घटनाएं घटी हैं उसे देख कर समझ में आ गया होगा की अन्य धर्म में जाकर प्यार मोहब्बत नहीं मिलेगा बल्कि, धोखा ओर मौत मिलेगी , इसलिए अपने धर्म के अपने समाज के लोगों में ही ,शादी करें , वह अपने बड़ों की मर्जी से करें लालच में आकर या किसी के बहकावे में आकर अपने धर्म को ना छोड़े
कार्यक्रम के आखिर में आरती की गई पल्लव पाया गया
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत रायपुर की वार्ड पंचायत के सामाजिक संस्थाओं के अध्यक्ष पदाधिकारीओ ने सांई जी का स्वागत सत्कार किया सांई जी ने भी सभी का शाल पहनाकर सम्मान किया
जिन में प्रमुख है महेश दरयानी आनंद कुकरेजा श्रीचंद सुंदरानी रोमा वाधवानी राजेश वाधवानी सुभाष बजाज सागर दुलानी अन्य बड़ी संख्या में लोग शामिल थे
आए हुए सभी भक्तजनों के लिए आम भंडारे का आयोजन किया गया
बड़ी संख्या में भक्त जनो ने आम भंडारा ग्रहण किया आज के इस पूरे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश महाराष्ट्र से पहुंचे थे इस पूरे कार्यक्रम का सफल बनाने में थावानी परिवार एवं सिंधी समाज रायपुर के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा
जीनमे प्रमुख है मुकेश थावानी
विकास थावानी,भरत थावानी
दिपक थावानी,गन्नु उदासी गुलशन उदासी,तनेश भावेश आदि
भवदीय
विजय दुसेजा
