दुर्ग, 21 मार्च 2025 – महात्मा गांधी वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की विश्वविद्यालय इकाई द्वारा विश्व वानिकी दिवस के उपलक्ष्य में “वन संरक्षण में युवाओं की भागीदारी” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वानिकी संकाय के शोधार्थीयो एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया और वन संरक्षण की आवश्यकता एवं इसमें युवाओं की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं
कार्यक्रम का शुभारंभ इस वर्ष के विश्व वानिकी दिवस के शीर्षक ” वन एवं भोजन” की चर्चा से प्रारंभ हुईं।
दुष्यंत साहू , (शोधार्थी प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन विभाग) ने वन संरक्षण की वर्तमान स्थिति और इससे जुड़ी वैश्विक चुनौतियों के विषय में बताया कि वनों के अंधाधुंध कटाव के कारण जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का नुकसान और प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे पृथ्वी का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है। इसके संरक्षण हेतु हमारी स्वयं की क्या भूमिका हो सकती है, किस तरह से हम सस्टेनेबल डेवलपमेंट के विषयों को समाज में ले जाकर जागरूकता ला सकते है और “यदि हमें पृथ्वी को बचाना है तो हमें अपने वनों को बचाना होगा और युवा पीढ़ी इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”
इसके पश्चात, शोधार्थियों और छात्रों ने “युवाओं द्वारा वन संरक्षण में किए जा सकने वाले प्रयास” पर अपने विचार प्रस्तुत किए। शोधार्थीयो ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीक और नवाचार की शक्ति का उपयोग करके वन संरक्षण के लिए प्रभावी अभियान चला सकती है।

मुख्य बिंदु:
- वनों के महत्व पर चर्चा : शोधार्थीयो ने वनों के पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान, जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और आजीविका के स्रोत के रूप में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
शिवम भरद्वाज (शोधार्थी) - युवाओं की जिम्मेदारी: युवाओं को वनों के अवैध कटाव को रोकने, वृक्षारोपण अभियान चलाने, जागरूकता फैलाने और सरकारी नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में योगदान देने का आह्वान किया गया
राजू साहू (शोधार्थी) - तकनीकी समाधान: कुछ शोधार्थियों ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सैटेलाइट इमेजिंग और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वनों की रक्षा की जा सकती है।
रमेश कुमार (शोधार्थी) - सतत विकास लक्ष्य (SDGs) और वन संरक्षण: वक्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के तहत वनों की भूमिका पर चर्चा की और बताया कि वन संरक्षण से कई वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
विनोद कुमार (शोधार्थी)
छात्रों की भागीदारी और संकल्प
संगोष्ठी में शामिल छात्रों ने भी वन संरक्षण को लेकर अपने अनुभव साझा किए और कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे, जैसे –
- विश्वविद्यालय स्तर पर वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत
- “एक जन्मदिन, एक पौधा” अभियान
- जंगलों की सुरक्षा के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना
- वन संरक्षण पर शोध और नवाचार को बढ़ावा देना
इस अवसर पर अभाविप के कार्यकर्ता दिनेश मनहरे ने युवाओं से आह्वान किया कि वे वन संरक्षण की दिशा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं और आज के दिन से वन संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवनचर्या में शामिल करना पड़ेगा।
अभाविप महात्मा गांधी वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग इकाई के कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे वन संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण ऐसे विषयों को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करते रहेंगे। इस अवसर पर खिलेश टेकाम, साधना, प्राची, साकेत कोसमा, शशिकांत, पल्लवी एवं महाविद्यालय के छात्र – छात्राए उपस्थित रहे।
– अभाविप, महात्मा गांधी वानिकी विश्वविद्यालय इकाई जिला दुर्ग छत्तीसगढ़