विजय की कलम
कुछ दिनों से मीडिया में यह न्यूज़ सुर्खियों में बनी हुई है कि पहले वहां की महाराष्ट्र सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया था उसे अभी फिर से लागू करने के लिए कहा जिसमें कहा गया था कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक सरकारी स्कूलों में प्रथम भाषा मराठी दित्य भाषा अंग्रेजी व तृतीय भाषा के रूप में हिंदी को मान्यता दी गई है यानी की हिंदी भाषा को तीसरे भाषा के रूप में रखा गया है पढ़ाई में इसमें कोई गलत नहीं है पर वहां के कुछ नेताओं को जिन्हें कुर्सी की भूख है सत्ता की भुख है जो उसे सालों से कुर्सी और सत्ता से बाहर है उन्हें तकलीफ हो रही है और आने वाले बीएमसी चुनाव में किसी भी तरह कुर्सी को हासिल करने के लिए मराठी अस्मिता के नाम पर मराठी भाषा के नाम पर नाटक और ढोंग किया जा रहा है?
दो भाई जो करीबन 20 साल से जुदा थे आज दोनों को समझ में आ गया है कि अब कुर्सी चाहिए सत्ता चाहिए तो एक होना पड़ेगा और जनता को मूर्ख बनाने के लिए भाषा का मुद्दा उठाया है?
क्योंकि इनकी राजनीति की रोटियां इस भाषा विवाद में ही सेकी जाती है इनको यह विरासत में मिली हुई है?
जिस भाषा का यह विरोध कर रहे हैं सबसे पहला सवाल है क्या वै खुद पाकिस्तान में रहते हैं?
नहीं वह हिंदुस्तान में रहते हैं भारत में रहते हैं तो भारत और हिंदुस्तान हिंदी शब्द से बना हमारा देश है जिस भारत मां की हम अपने आप को संतान कहते हैं वें उस मां का अपमान कर रहे हैं? पाकिस्तान में उर्दू बोली जाती है तो हिंदुस्तान में हिंदी क्यों नहीं बोली जाएगी वह हमारी मातृभाषा है हमारी राष्ट्रीय भाषा है उसका सम्मान हर एक भारत में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को करना चाहिए चाहे वह किसी भी धर्म का हो किसी भी जात का हो और किसी भी संप्रदाय का हो उसे हिन्दी भाषा का सम्मान करना चाहिए क्योंकि वह भारत देश में रहते हैं और रही बात प्रादेशिक भाषा का तो आपको किसने मना किया है कि आप अपनी मातृभाषा में न पढ़े या पढ़ाई न करें या न बोले? किसी ने भी मना नहीं किया है बल्कि हिंदी को तो तीसरी भाषा का दर्जा दिया गया है जबकि होना ऐसा चाहिए उसे सेकंड भाषा के रूप में रखना चाहिए पर उन्होंने अंग्रेजी को रखा है क्या अंग्रेजी और अंग्रेज उनके रिश्तेदार हैं? अंग्रेजों ने 200 साल तक हमें गुलाम रखा जिन अंग्रेजो ने आपके पूर्वजों को मारा कुचला उस अंग्रेजी भाषा को आप बोलने में पढ़ाई करने में बड़ा गर्व महसूस करते हैं? और अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी में पढ़ाई करने में बोलने में आपको शर्म आती है? हिंदुस्तान की सबसे बड़ी फिल्म सिटी फिल्मी उद्योग मुंबई में है वहाँ भी हिंदी भाषा फिल्में बनती हैं अगर इतनी ही तकलीफ है हिंदी भाषा से पढ़ाने में बोलने में पढ़ने में तो उस फिल्म सिटी को क्यों मुंबई में रखा है? बंद कर दीजिए बोल दीजिए उठा कर ले जाए छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश यूपी या बिहार में जहां पर हिंदी बोली जाती है
सबसे ज्यादा पैसा वहीं से सरकार को टेक्स के रूप में मिलता है हिंदी फिल्मों से और हिंदी फिल्में हिंदी प्रदेशों में ज्यादा देखी जाती है आज वहां की अर्थव्यवस्था जो मजबूत है वह हिंदी भाषी लोगों के कारण है जिओ सबसे बड़ी जो कंपनी है इसका सबसे ज्यादा सिम इस्तेमाल हिंदी भाषा प्रदेश के लोग करते हैं अगर सही मायनो में देखा जाए ना तो आपको हिंदी भाषा वाले प्रदेश के लोगों का सम्मान करना चाहिए? पर आप ऐसा ना करके उनका अपमान कर रहे हैं अगर कोई हिंदी बोलता है तो आपके कार्यकर्ता उनकाे थप्पड़ मारते हैं ?धमकी देते हैं? कि महाराष्ट्र में रहना है तो मराठी बोलनी पड़ेगी क्यों? जब आप कहते हो कि महाराष्ट्र में रहना है तो मराठी बोलनी पड़ेगी तो
(हम भी कहते आप हिंदुस्तान में रहते हो तो हिंदी भी बोलनी पड़ेगी?)
कुर्सी के लिए सत्ता के लिए वहां की जनता के बीच में जहर मत घोलीए, अंग्रेजों की तरह फूट डालो ओर राज करो की नीति मत अपनाइए?
एक तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री विदेश में जाकर हिंदी में बात करते हैं अपने भारतीयों से मिलते हैं हिंदी में बात करते हैं और बड़े गर्व महसूस करते हैं और दूसरी तरफ अपने ही देश में एक प्रदेश में हिंदी का इस तरह अपमान क्यों?
स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने भी नारा दिया था जय जवान जय किसान वह हिंदी में दिया था स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने संयुक्त राष्ट्र में जब भाषण दिया था तो हिंदी में दिया था भारत के युवा सम्राट कहे जाने वाले सनातन धर्म के ध्वज को विदेशों में लहराने वाले अमेरिका में जब धर्म संसद में भाषण दिया तो हिंदी में दिया था और उनका नाम है स्वामी विवेकानंद, ऐसे कई और हजारों देश के भारत मां के सच्चे सपूतों ने अपने देश का वह अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी का मान सम्मान बढ़ाया है हिंदी में बोलकर,
और एक बात आप क्यों भूल जाते हो आप के प्रदेश के मराठी लोग देश के हर हिस्सों में फैले हैं खासकर हिंदी प्रदेशों में ज्यादा है तो कभी क्या हमने कहा है कि हमारे प्रदेश में आए हो तो हमारी भाषा बोलो नहीं तो यहां से चले जाओ? नहीं कहा जिसको जो भाषा आती है उसका प्रयोग करें अगर आपको नहीं आती है तो सीखें अच्छी बात है और नहीं सीखेंगे तो आपका धंधा नहीं चल पाएगा आप खुद सोचे कि मैं अपने ग्राहकों से कौन सी भाषा में बात करूं ताकि वह समझ जाए , नहीं सीखेंगे तो परेशानी आपको जाएगी लेकिन किसी के ऊपर जोर जबरदस्ती नहीं की पर आप ऐसा जोर जबरदस्ती करके गलत कार्य कर रहे हैं?
वहां कि सरकार को कड़े नियम बनाने चाहिए और जो उस नियम को तोड़ता है उस पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए,
यह लोग अपने आप को हिंदू कहते हैं यह तो सनातनी कहने के लायक नहीं है? हिंदू का मतलब समझते हैं हिंदू भी हिंदी भाषा का वर्ल्ड है हिंदू देवी देवता भी संस्कृत भाषा का प्रयोग करते थे नाकी मराठी भाषा का तो क्या आप उसे भी मानना छोड़ दोगे भगवान को?
जिस भाषा के नाम पर आपकी रोटी चलती है आपका पेट भरता है उसी भाषा का अपमान क्यों?
देश का जवान आपकी रक्षा के लिए अपनी आहुति दे देता है तब तो वह यह नहीं कहता कि मैं मराठी हूं मैं हिंदी प्रदेश में रहने वाला हूं भाषा के नाम पर धोखा देना बंद करें हिंदी का अपमान बंद करें कुर्सी के लिए सत्ता के लिए इस नौटंकी को बंद करें, आपको अगर इतना ही प्रेम है तो आप बोलिए ना आपको किसने मना किया है ,अपनी पार्टी का विस्तार हिंदी प्रदेशों में क्यों कर रहे हो जब आपको तकलीफ है हिंदी से लोकसभा विधानसभा चुनाव आते हैं तो अलग से रेलिया करते हो हिंदी भाषा बोलने वाले लोगों के लिए तब उस समय आपको वोट बैंक नजर आता है अब देखा कि वोट बैंक खिसक गया है बीजेपी में चला गया है तो आपको अब मराठी वोट बैंक चाहिए ,
महाराष्ट्र कि जनता से हम यही कहना चाहेंगे इन मतलबी और नौटंकी धोखेबाज नेताओं के चक्कर में मत आए,
आप भारत मां की संतान है हम भी संतान हैं सब आपस में मिलचुल कर रहे ,
जिसको जो भाषा आती है वह उस भाषा को बोल सकता है और बोले जिसको धंधा करना है बिजनेस करना है वह भाषा सीखेगा किसी के ऊपर भी जोर जबरदस्ती ना करें और हिंदी भाषा तो सबको आनी चाहिए और गर्व होना चाहिए ,
गर्व से कहे कि हम हिंदुस्तानी,है हम भारतवासी हैं ,
हिंदी भाषा भी सीखनी चाहिए और सबको बोलनी भी चाहिए सच्चा हिंदुस्तानी वही है जो अपनी मातृभाषा को सीखे भी बात करें भी और लिखे भी जब आप विदेश में जाएंगे तो अपनी प्रादेशिक भाषा में बात करेंगे तो पता नहीं चलेगा कि आप किस देश से हैं अगर आप हिंदी में बात करेंगे तब पता चलेगा कि आप हिंदुस्तान से हैं,
गर्व से कहें हम भारतवासी हैं हम हिंदुस्तान के रहने वाले हैं हम भारत मां की संतान हैं और हम हिंदी में बात करेंगे और हिंदी में लिखेंगे हिंदी में पढ़ाई भी करेंगे
हमारे सनातन धर्म की पहचान भी यही है अभी कुछ महा पूर्व प्रयागराज में माह कुंभ का आयोजन किया गया तब तो किसने ऐसा नहीं कहा कि आप हिंदी में बात नहीं करते हो तो आप गंगा में डुबकी नहीं लगा सकते हो ,जब गंगा मां सब की है भारत मां सब की है तो हिंदी भाषा भी आप सब की है
संपादकीय