सिंधी समाज के सभी धर्म प्रेमी बन्धु को इस सन्देश के माध्यम से एक जानकारी दी जा रहीं है की श्री झूलेलाल जी के प्रचार प्रसार में और उनकी सेवा में जो भी सिंध में रहते थे उनको ठाकुर की उपाथी केवल एक पहचान के रुप में मिली समाज के बन्धु से निवेदन है ए केवल उस पालनहार श्री झूलेलाल जी की सेवा भक्ति और प्रचार प्रसार के लिए मिली है कृप्या इसे श्री झूलेलाल जी के वंशज होने का भ्रम ना पाले सभी ठकुर साहिब हमारे आदरणीय हो सकते है किसी किसी के कुलगुरू भी हो सकते हैं।। पर श्री झूलेलाल जी ने धर्म का प्रचारक बनाया अपने दोनो भाई और पुगर जी को और ठकुर ( पुजारी प्रचारक की उपाधि दी ) जो पीढ़ी दर पीढ़ी होती आ रही है
कृपया ध्यान दे ।। आप संतो का मान सम्मान जरूर करे अपने हिसाब से और संत भागो से मिलते हैं।। पर किसी भी संत/ महंत / ठकुर/ को श्री झूलेलाल जी के वंश से ना जोड़े ।।
श्री झूलेलाल जी परम् पूज्य है परमेश्वर का रुप है जो अपनी लीला करके प्रेम सद्भावना का संदेश दिया ।
सेवा में ~
श्री झूलेलाल सेवा समिति बालाघाट
सूर्यवंशी महेश लाल जी बालाघाट