भगवान शंकर की भक्ति हमें निर्भय और मोह माया के बंधनों से दूर करती है। ,,,संत चिन्मयानंद बापू,,
फास्ट न्यूज….खंडवा
कमल नागपाल
प्रस्तुति- ताराचंद रोहड़ा
खण्डवा।संतों की वाणी संत की नहीं होती है, वह भगवत वाणी होती है।भागवत कथा को ध्यान से सुनना चाहिए संत भगवत विषयक बात करते हैं। कथा श्रवण करने से भीतर के दोष मिटते हैं। हमारा अंतःकरण निर्मल होता है ।हमारा अंतःकरण जितना निर्मल होगा, उतना सत्य के नजदीक पहुंचेंगे।हमारा अंतरण बहुत मालिन हो गया है। इसलिए अंदर बैठे भगवान का अनुभव नहीं होता।हमारे शरीर में आनंद स्वरूप परमात्मा विद्यमान है। परमात्मा सर्वत्र है हमारे भीतर है, फिर भी हम दुखी होते हैं। ऐसा कोई स्थान नहीं है, जहां भगवान ना हो ।हम अनुभव नहीं कर पाते हैं

।हमारे अंदर के ज्ञान का जो प्रकाश है वही ब्रह्म है। यह उदगार चिन्मयानंद जी महाराज ने भवानी माता मंदिर प्रांगण में आयोजित शिव पुराण कथा के छठवें दिवस व्यक्त करते हुए कही।विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट की ओर से बालाजी धाम के समय भवानी माता प्रांगण में 1 अगस्त से अंतर्राष्ट्रीय संत चिन्मयानंद बापू जी की श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन चल रहा है जिसमें बड़ी संख्या में मातृ शक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का श्रवण कर रहे हैं, साथ ही गाए हुए भजनों पर झुमते हुए नृत्य भी कर रहे हैं।कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए बापूजी ने कहा कि शिव महापुराण हमारे समस्त प्रकार के पापों को नष्ट तो करती ही है साथ ही हमारे जीवन के जितने भी विकार हैं उनसे भी मुक्त हमें कथा करती है।भगवान शंकर की भक्ति हमें निर्भय और मोह माया के बंधनों से दूर करती है और जीवन में कोई भी मुकद्दर का लिखा हुआ संकट भी भगवान शंकर दूर कर सकते हैं,क्योंकि ब्रह्मांड में भोलेनाथ ही एक ऐसे दिव्य शक्ति है जो हमारे होनी को भी मिटा सकते हे। परमात्मा को खोजने दर्शन करने हम काशी मथुरा महाकाल जाते हैं जाना चाहिए क्योंकि यह तीर्थ स्थान है लेकिन परमात्मा हमारे अंदर ही मौजूद है हम अच्छे भाव से परमात्मा के नित्य दर्शन कर सकते हैं।बापू ने कहा कि ऋषि मार्कंडेय ने शिवलिंग की पूजा की ओर उनकी 5 वर्ष की आयु को भी भोलेनाथ ने दूर कर दिया और उनको दीर्घायु का आशीर्वाद दिया सिर्फ भोलेनाथ की आराधना करने से व्यक्ति को दीर्घायु और पापी से पापी व्यक्ति को भी नरक में जाने से भोलेनाथ बचाकर अपने धाम में वास देते हैं।कार्यकर्ताओं ने व्यासपीठ को नमन कर बाबूजी का स्वागत अभिनंदन आरती कर कथा का श्रवण किया।