रेखा आहुजा शहर के अंतिम छोर पर उसलापुर स्टेशन की रेल पटरियों के आस पास बसी उपेक्षित बस्ती *ठेठा डबरी* का एक होनहार छात्र जिसकी माता श्री संभ्रांत घरों में जाकर खाना बना उससे मिली मजदूरी से अपने परिवार का उदर पोषण करती है उस कक्षा 7 वी के होनहार बच्चे के आने जाने हेतु एक सायकल की नितांत आवश्यकता थी बच्चे की इस समस्या की जानकारी समाजिक संस्था सेवा एक नई पहल की संवेदन शील संयोजिका रेखा आहुजा जी को पता चली उनके निरंतर प्रयास और सामाजिक आव्हान से प्रेरित हो राजकिशोर नगर पूज्य सिंधी पंचायत के भूतपूर्व अध्यक्ष सच्चा नन्द मंगलानी जी की युवा सुपुत्री सिमरन मंगलानी की सहृदयता से प्राप्त आधुनिक स्मार्ट साइकल उस बालक को प्रदान करते हुए रेखा आहुजा जी ने कहा कि परिस्थितियों चाहे जैसी हो सहज सरल शिक्षा और उत्तम स्वास्थ्य हमारी संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल रहता आया है ~ इस भाव भरी भेंट को देते हुए संस्था के संयोजक सतराम जेठमलानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा में *ठेठा* का अर्थ होता है किसी कुल्हाड़ी अथवा रापा के बेट में आए गैप को छोटी छोटी लकड़ियों का चिपा डालकर टाइट करना और *डबरी* का अर्थ है जल का छोटा स्त्रोत ~ अतः आज हमारी संस्था ने अपनी संयोजिका के सेवा स्त्रोत को माध्यम बना इस नन्हे बालक की पढाई रूपी बेट में आ रहे गैप को साइकल रूपी चीपा से भर कर *ठेठा डबरी* शब्द को सार्थक कर दिया।