कार्तिक पुन्नी के पावन तिहार
जांजगीर जिला मुख्यालय ले रक्सहूं मुड़ा म आठ किमी दुरिहा म हरियर शांत गांव बोड़सरा हेबय, भलेच इहा ऐतिहासिक धरोहर नइ हेबय, फेर इहाँ के माटी म बसे परंपरा अउ कहिनी एकठन अलगेच पहिचान देथे। श्यामकार्तिक महोत्सव सिरिफ धार्मिक आयोजन नोहय एतो लोकभक्ति, आस्था, अउ गांव के एकता के जियत संगम आय। ए परब पुरखा मनखे के विरासत ल जरी ले जोड़े रखे हेबय।पाछु के चार दसक ले भी जियादा बखत ले चलत आवत ए परब, कार्तिक पुन्नी के पावन मउका म अपन चरम उत्साह म पहुँच जाथे। भगवान कार्तिक के मूर्ति स्थापना ले सुरु होके पुन्नी तक चलइया ए आयोजन गाँव म एकठन नवा जोश, उमंग अउ भक्ति के लहर भर देथे।जइसेच ए परब के सुरुवात होथे, पूरा गाँववाला मन जी उठथे पारा मुहल्ला म चमक दमक, घर दुआर म पहुना के अगोरा अउ सब्बो अकन भक्ति के सोर जनाथे। जवान होवय के सियान, माईलोगिन होवय के नान्हे लइका, सब्बो के मन म परब ल लेके लहर उमड़ परथे। पहुना ल देवता बरोबर माने जाथे ओमन बर अपनपन के भाव सफ्फा दिखथे।



तलवा, नवा अउ बमरी तलाव के पार म हटरी के चिकमिक नजारा होथे। झूलिया के आरो, दुकान म लाइन, चना-चरपटी के सुवाद, अउ लइका मन के हँसी का कहिबे सब्बो मिलके मेला ला अउ जिन्दा कर देथे।भगवान कार्तिक के मूर्ति स्थापना ले नौ दिन तक गाँव म गाना बजाना , कीर्तन-जागरन, नाचा-गम्मत अउ आर्केस्ट्रा के कार्यक्रम चलत रहिथे। छत्तीसगढ़ के नामी कवि, गवइहा अउ नाचा दल अपन कला ले परब म नवा ऊर्जा भर देथें।आखिरी दिन मांदर बाजा अउ कर्मा नाच के संग म भगवान श्यामकार्तिक ल थंडा करे जाथे। ए बेरा म भारी भीड़ उमड़ परथे मनखे मन के भीड़ देखके मन रोमांचित हो जाथे। अइहा श्रद्धा, आनंद अउ भक्ति के सुग्घर मिलन आय। ए परब के सबले बड़का बात एहर आय के गाँव ले बाहिर रहइया मनखे मन गांव आके अपन माटी, अपन लोगन, अपन संस्कृति ले फेर जुर जाथें। अतिथि देवो भव’ के भाव ले भींजे गांव के मनखे मन हर अवइया ल अपन परिवार जइसे सेवा सत्कार करथें।श्यामकार्तिक के परब सिरिफ जाँजगीर बस म नइ, बल्कि चारो मुड़ा म घलौक पहिचान बना डारे हेबय। ए एकठन अइसे मंच बन गे हेबय जेकर नाव ले इहाँ साहित्य, संगीत, कला अउ लोकसंस्कृति के जमघट होथे। नवा पीढ़ी अपन जरी, अपन विरासत अउ अपन पहिचान ला जानथे समझथे।जेन बखत तक हमर संस्कृति अउ विरासत जिंदा रही, तेन बखत तक ले हमर पहिचान जिंदा रही।ए परब हमर माटी के सुवास, हमर गवई जिनगी के पहिचान अउ अपन लोक परंपरा विरासत के गौरव चिनहा आय। त्रिभुवन लाल साहू
बोड़सरा, जांजगीर, छत्तीसगढ़