बिलासपुर / चक्करभाटा :- धर्मनगरी कहे जाने वाला चक्करभाटा में विगत 53 वर्षों से श्री झूलेलाल चालिहा महोत्सव मनाया जा रहा है सन् 1972 में बाबा गुरमुख दास साहेब जी के द्वारा अपने नीवास स्थान में चालीहा
महोत्सव आरंभ किया था सन् 1976 में मंदिर की स्थापना हुई और श्री झूलेलाल मंदिर में चालीहा महोत्सव की धूम शुरू हुई सन् 2000 में संत सांई लाल दास जी के गद्दीनशीन होने के बाद उनके द्वारा इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए चालीहा महोत्सव मनाया जाने लगा सन् 2004 में संत सांई लाल दास जी के द्वारा चालीहा महोत्सव मोंन धारण करना आरंभ किया उनका कहना है कि चालीहा महोत्सव भगवान की भक्ति आराधना सिमरन का समय है और मोन धारण करने से तन और मन को शांति मिलती है और आत्मा का सीधा कनेक्शन भगवान से जुड़ जाता है साल भर में अगर हम प्रतिदिन 2 घंटा 30 मिनट का हिसाब लगाए तो 40 दिन होता है, 365 दिन का दसंवत,

मौन धारण करने से मन भटकता नहीं है एकाग्र और स्थिर रहता है जिस उद्देश्य के लिए चालीहा में मौन रख रहे हैं ओर चालीहा मना रहे हैं वह उद्देश्य पूरा
करने में आसानी होती है और यह तपस्या अपने लिए नहीं , भक्तों के लिए और सर्व समाज के उद्धार के लिए करते हैं ताकि जो भी भक्त हैं अपने घरों में घाघर रखे हैं या जो चालीहा महोत्सव का उपवास रखते हैं उन सभी साध संगत की भक्तों की मनोकामना पूरी हो हम तो कहते हैं कि चालीहा महोत्सव में आप भी अगर 40 दिन मौन व्रत रहते हैं तो अच्छा है, ओर
नहीं रख सकते हैं तो कोई बात नहीं कम से कम प्रतिदिन एक घंटा मौन धारण करें और वह एक घंटा शांति से भगवान का सिमरन करें नाम जपे तो उसकी जो कमाई होगी नोटों की कमाई से 10 गुना अलग होगी और बढ़ोतरी होगी और सुख शांति की स्मृद्वी होगी चालीहा महोत्सव का उद्देश्य अपने भगवान झूलेलाल का पूजन उनकी भक्ति करना अपने समाज को अपने लोगों को एकजुट करने का एक सूत्र है अपनी बोली भाषा संस्कृति को बढ़ावा देने का एक माध्यम है और किस तरह हम भगवान को पा सकते हैं उसका एक रास्ता है झूलेलाल चालिहा महोत्सव की शुरुआत सुबह 9:00 बजे ध्वज वंदना से की गई 9:30 बजे बाबा गुरमुख दास जी की कुटिया में पहुंचकर मथा टेका और चालीहा महोत्सव सुख शांति से पूरा हो और सबकी मनोकामना पूरी हो उसके लिए प्रार्थना की 10:00 बजे पंडित पूरन शर्मा के संग अखंड ज्योत को प्रज्वलित करके चालीहा महोत्सव की शुरुआत की गई 10:30 झूलेलाल अमर कथा का पाठ आरंभ किया गया 11:00 महा आरती की गई प्रसाद वितरण किया गया


सांई जी के द्वारा नित्य नियम का पालन करते हुए तालाब पहुंचे और विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की 12:00 बजे वरुण देव यज्ञ किया गया एक से दो बजे तक नाम का जाप किया गया प्रतिदिन होने वाले मंदिर में नित्य नियम इस प्रकार है सुबह 9:00 बजे आरती 9:30 बजे भगवान झूलेलाल अमर कथा का पाठ 10:00 बजे प्रसाद वितरण संध्या 7:00 बजे महा आरती रात्रि 10 से 11:30 बजे भगवान झूलेलाल की धूनी 12:00 बजे आरती पलव ओर प्रसाद वितरण आज के इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में बाबा गुरमुख दास सेवा समिति श्री झूलेलाल महिला सखी सेवा ग्रुप की सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा इस पूरे कार्यक्रम का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव प्रसारण किया गया हजारों की संख्या में घर बैठे लोगों ने आज के कार्यक्रम का आनंद लिया