नव वर्ष की निर्मल उषा किरण,
मन में भर रही रोशनी की चुभन।
नीलिमा से सुशोभित आच्छादित गगन,
रवि ने बिखेरी नव वर्ष की उषा किरण।।१नव कुसुम स्फूटित को व्याकुल, भौरें गूंजन करते गुन गुन। पंछी कलरव में हों रहा हैं मगन,
रवि ने बिखेरी नव वर्ष की उषा किरण।।२
नव बरस की सुनहरी किरण,
नव आगमन पर हो रही प्रसन्न।
प्रकृति में ध्वनित संगीत गुंजन,
प्रफुल्लित हो रहा है मन अंतकरण।
रवि ने बिखेरी नव वर्ष की उषा किरण।।३
डॉ. विजय पाटिल
शिक्षक सह साहित्यकार
सेंधवा जिला बड़वानी मप्र