जांच के दौरान 140 स्कूल बसें निर्धारित मापदंडों पर सही पाई गईं, जबकि 93 बसों में विभिन्न कमियां सामने आईं। इनमें 18 बसें बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र, 37 बिना अग्निशमन यंत्र, 12 में बीमा/ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी कमी, 2 बिना बीमा, 1 बिना फिटनेस, 3 बिना टैक्स, 10 बिना प्राथमिक उपचार पेटी, 3 बिना सीसीटीवी, 5 बसों के विंड ग्लास टूटे हुए तथा 2 बसें बिना सुरक्षा जाली के पाई गईं। सभी बस संचालकों को तीन दिवस के भीतर कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी शिविर के दौरान बस संचालकों, ड्राइवरों, कंडक्टरों एवं स्टाफ का स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण भी कराया गया। कुल 233 चालकों एवं स्टाफ के स्वास्थ्य परीक्षण में 26 शुगर, 21 बीपी तथा 9 चर्म रोग से पीड़ित पाए गए। उन्हें शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श लेकर नियमित उपचार कराने की हिदायत दी गई।
यातायात पुलिस अधिकारियों ने बस संचालकों को निर्देशित किया कि वे माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार ही स्कूल बसों का संचालन करें। मानकों का पालन नहीं करने पर मोटर व्हीकल अधिनियम के तहत कार्रवाई, वाहन को ब्लैकलिस्ट करने एवं परमिट निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। जिन स्कूलों की बसें जांच शिविर में नहीं लाई गईं, वहां जाकर निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे, आरटीओ अधिकारी असीम माथुर एवं योगेश्वर प्रसाद टंडन सहित यातायात व परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्व सहायता समूह के सदस्य उपस्थित रहे।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस दिशा में जांच व जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेगा।