शिव अनुराग भवन में ब्रह्माकुमारीज के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि मनाई गई।
सेवाकेंद्र में चार धाम की अनुकृति सजाई गई जिससे वातावरण ब्रह्मा बाबा की तपस्या भूमि माउंट आबू जैसा बन गया…
बिलासपुर:
ब्रह्माकुमारीज़ के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा का जीवन मानवता के लिए आध्यात्मिक जागरण और विश्व-कल्याण का प्रेरणास्रोत है। उनका लौकिक नाम लेखराज कृपलानी था। उनका जन्म वर्ष 1876 में सिंध प्रांत के हैदराबाद में हुआ। वे अपने समय के एक सफल हीरा व्यापारी थे, किंतु उनका अंतःकरण सदैव धर्म, करुणा और सादगी से परिपूर्ण रहा।


उक्त बातें ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि, जो कि विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर शिव अनुराग भवन राजकिशोर नगर में आयोजित योग साधना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कही।
दीदी ने बताया कि वर्ष 1936 में उनके जीवन में एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक परिवर्तन आया। दिव्य अनुभूतियों के माध्यम से उन्हें यह स्पष्ट हुआ कि परमपिता परमात्मा शिव उन्हें माध्यम बनाकर मानव आत्माओं को सत्य ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। इसी के साथ दादा लेखराज कृपलानी का जीवन एक लौकिक गृहस्थ से ब्रह्मा बाबा के रूप में आध्यात्मिक पिता बनने की ओर अग्रसर हुआ।


दीदी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा ने अपना संपूर्ण जीवन, धन और सामर्थ्य ईश्वरीय सेवा और मानव उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनके माध्यम से स्थापित ईश्वरीय ज्ञान यज्ञ आज ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रूप में देश-विदेश में शांति, पवित्रता और आत्म-परिवर्तन का संदेश दे रहा है।
दीदी ने पवित्रता, सादगी, निमित्त भावना, अटूट ईश्वर-विश्वास और समान दृष्टि को ब्रह्मा बाबा के जीवन की विशेषताएं बतायी।
उन्होंने कहा कि पिताश्री ने नारी शक्ति को आध्यात्मिक नेतृत्व देकर समाज में एक नई सोच और दिशा प्रदान की, जो उस युग में अत्यंत क्रांतिकारी कदम था।
अनेक सामाजिक विरोधों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद ब्रह्मा बाबा अपने संकल्प पर अडिग रहे। उनका जीवन यह सिखाता है कि ईश्वर में पूर्ण आस्था रखने वाला व्यक्ति हर परिस्थिति में विजयी होता है।


18 जनवरी 1969 को ब्रह्मा बाबा ने देह त्याग कर अव्यक्त फरिश्ता स्वरूप धारण किया। आज भी उनके आदर्श और शिक्षाएँ करोड़ों लोगों के जीवन में शांति, शक्ति और सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनी हुई हैं।
पिताश्री ब्रह्मा बाबा का जीवन यह संदेश देता है कि त्याग और तपस्या से ही सच्चा विश्व-परिवर्तन संभव है।
सेवाकेंद्र में पिताश्री ब्रह्मा बाबा का स्मृति स्तम्भ – शांति स्तंभ जो शक्तिशाली बनने का संकल्प प्रदान करता है, बाबा की कुटिया- परमात्मा से अपने दिल की बात करने के लिए, बाबा का कमरा – स्वयं में पिताश्री के संस्कारों की समानता लाने के लिए और हिस्ट्री हॉल – व्यर्थ विचारों से मुक्त होने के लिए – इन चार धामों की अनुकृति सजाई गई। जिससे वातावरण ब्रह्मा बाबा की तपस्या भूमि माउंट आबू जैसा बन गया।
सुबह 6 से 11:30 बजे तक यह तपस्या कार्यक्रम रहा जिसमें शहर व गांव से बड़ी संख्या में साधक जनो ने योग अभ्यास किया और दीदी से मंजू दीदी से वरदान लेकर फल, गाजर-दूध और तिल के लड्डू का भोग स्वीकार किया।