
बिलासपुर, 13 फरवरी। हिंदवी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के अद्वितीय जीवन, पराक्रम और आदर्शों पर आधारित विश्व-प्रसिद्ध ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा का भव्य शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस से ही इस विराट प्रस्तुति ने जन-जन को राष्ट्रभावना, न्याय और स्वराज के संकल्प से जोड़ते हुए भावविभोर कर दिया।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक सर्व श्री धर्मलाल कौशिक, श्री सुशांत शुक्ला,श्री विश्वविजय सिंह तोमर, श्री भूपेश सव्वनी एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। साथ ही कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह, तथा नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश सर्वे सहित प्रशासनिक अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। बिलासपुर संभाग के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में नागरिकों ने भागीदारी कर इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के साक्षी बनें। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता, छत्तीसगढ़ महतारी एवं स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। इसके पश्चात माँ भवानी की आरती के साथ विधिवत मंचन प्रारंभ किया गया।


लगभग तीन घंटे तक चले इस भव्य महानाट्य ने आरंभ से अंत तक दर्शकों को भावनात्मक रूप से बांधे रखा। विशाल मंच सज्जा, सजीव युद्ध दृश्य, प्रभावशाली प्रकाश एवं ध्वनि संयोजन, सशक्त संवाद अदायगी तथा लोकगीतों और भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को जीवंत बना दिया। राष्ट्रवाद, रामराज्य की प्रेरणा, स्वराज और न्याय के संदेश को जिस प्रभावी शैली में प्रस्तुत किया गया, उसने दर्शक-दीर्घा को बार-बार तालियों की गूंज से भर दिया।
राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने जानकारी दी कि यह ऐतिहासिक महानाट्य 14 एवं 15 फरवरी की शाम आयोजित होगा। उन्होंने आम नागरिकों से सपरिवार उपस्थित होकर इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने और शिवाजी महाराज के आदर्शों से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि

“‘जाणता राजा’ केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि समाज की चेतना को जागृत करने वाला एक सांस्कृतिक आंदोलन है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से हमें स्वराज, न्याय, साहस और जनकल्याण की प्रेरणा मिलती है।” छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग का उद्देश्य है कि समाज का हर वर्ग—बच्चे, युवा, महिलाएं और वरिष्ठजन—इस गौरवशाली इतिहास से जुड़े और उसे आत्मसात करे। मैं बिलासपुर और पूरे संभाग की जनता का आभार व्यक्त करता हूँ और आगामी दिनों में और अधिक सहभागिता की अपील करता हूँ।”बिलासपुर में पहली बार आयोजित इस विराट ऐतिहासिक प्रस्तुति ने न केवल सांस्कृतिक चेतना को जागृत किया, बल्कि नई पीढ़ी को स्वाभिमान, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के मूल्यों से भी जोड़ने का प्रभावी प्रयास किया है।