(जो सद्गुरु के बताए हुए मार्ग पर चला है वह हमेशा खुश रहा है)
(21 बटुकों का हुआ जनेऊ संस्कार ,छोटे बच्चों का हुआ मुंडन संस्कार)
कटनी /मध्यप्रदेश:- श्री श्री 1008 सद्गुरु बाबा थावरदास साहब जी के 155 वै वर्षी महोत्सव के दूसरे दिन सुबह 9:00 बजे नित्य नियम आरती पूजा पाठ 10:00 बजे मुंडन संस्कार 11:00 बजे हवन यज्ञ 12:00 बजे: 21 बटुकों का हुआ जनेऊ संस्कार विधि विधान के साथ पंडित जी के द्वारा 21 बच्चों का जनेऊ संस्कार संपन्न कराया गया आकाश म्यूजिकल पार्टी के द्वारा लेडीज संगीत🎤🎼🎹🎶, लड़ा सिंधी गीत संगीत की शानदार प्रस्तुति दी,

संध्या 6:00 बजे आरती पूजा पाठ 7:00 बजे आए हुए बाहर से कलाकारों के द्वारा भक्ति भरे सुंदर भजनों की प्रस्तुति रात्रि 8:00 बजे नारायण सांई जी के द्वारा सत्संग रूपी अमृत वर्षा की गई सद्गुरु बाबा थावरदास साहब जी का चालीसा का पाठ किया गया रात्रि 9:00 बजे से 12:00 बजे तक कटनी मैहर दरबार के सेवादारी और छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा सुंदर मनमोहक भक्ति भरे भजनों की शानदार प्रस्तुति दी एक से एक बढ़कर गीत भजनों पर नित्य किया छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा राधा कृष्ण भगवान भोलेनाथ दुर्गा माता राम,वह,अन्य देवी देवताओं के संजीव दर्शन करवाए सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत भगवान गणेश जी की आराधना से की गई,

बाबा थावरदास दरबार बिलासपुर कि महिला समिति एवं अन्य सेवा धारीयो के द्वारा शानदार संजीव नाटक की प्रस्तुति दी गई वह भक्ति भरे भजनों पर शानदार नृत्य के माध्यम से प्रस्तुति दी जिसे देखकर सभी लोग खुश हो गए और इस प्रस्तुति के लिए सभी बिलासपुर वासियों का तालियां बजाकर स्वागत व सत्कार किया बिलासपुर कि टिम ने धमाल मचा दी कटनी में उन्होंने जो नाटक मंचन किया , वह सच्ची कथा है और दरबार साहब के एक सेवादार से जुड़ी हुई है जो आज भी वह परिवार जीवित है इस कथा में दो अलग-अलग परिवारों की कहानी थी पहली कहानी का सार था कि एक निम्न परिवार दरबार साहब के बगल के पड़ोस में रहता था और दरबार साहब की सेवा करता था गुरु की सेवा करता था नित्य नियम करता था उसकी कृपा से बड़ा धन्ना सेठ बन गया झोपड़ी से महल बन गए तो उसने अब कहा कि यह झोपड़ी मेंरे रहने लायक नहीं है और परिवार सहित महल में चला गया गुरु ने कहा कि अगर तुम वहां जाओगे तो नितनेम कौन करेगा तो उसने कहा मैं अपने सत्ता में एक दिन आकर कर लूंगा लेकिन अब मैं यहां नहीं रहूंगा यह मैंरे लायक नहीं रहने की जगह गुरु ने कहा जैसे तुम्हारी इच्छा जैसे ही वह 🏰महल में पहुंचा कुछ दिन खुश रहा बढ़िया रहा कुछ साल के बाद अचानक समय बदला और ऐसा वक्त आया कि वक्त अब उसका ना रहा वह धन दौलत उसकी ना रही और अब वह वापस उसी स्थिति में आ गया जैसा पहले था और फिर से गुरु के दरबार में पहुंचा और माफी मांगा गुरु की कृपा से उसको सद्बुद्धि मिली और गुरु घर की सेवा करते हुए वह खुशी-खुशी अपना जीवन यापन करने लगा और फिर से ऊंचाई में छूने लगा दूसरी कहानी का सार यह है कि वह व्यक्ति अन्य समाज का था और मेहनत बहुत करता था पर उसे मेहनत का फल नहीं मिल पाता था जैसा उसे मिलना चाहिए एक दिन वह बाहर घूम रहा था तो एक संत अपने भक्ति में सिमरन में लीन था

।।वह संत के पास पहुंचा और बार-बार उसे कहने लगा आंखें 👀खोलो बाबा और मुझसे बात कीजिए संत ने आंखें खोली पूछा क्या बात है बच्चा तो उसने कहा बाबा मेरे साथ चलिए यह मेरा दुकान है मैं मेहनत करता हूं पर मुझे उसका फल उतना नहीं मिल पाता जीतना मेहनत करता हूं रोजी रोटी निकलना मुश्किल है मैं क्या करूं तो वह संत पूरे दुकान को निहारता है देखता है तब एक दरवाजा बंद मिलता है वह पूछता है इस दरवाजे के पीछे क्या है ताला खोलो जब ताला🔐 खुलता है और देखता है वहां पर बाबा जी की समाधि है व संत ज्ञानी था देखते ही तुरंत दण्डवत प्रणाम करता है समाधि पर और कहता है बच्चा तू मेरे से पानी मांगने आया है तेरे पास तो मीठा अमृत का समुंदर है जो तू चाहता है मैं कुछ नहीं दे सकता यह समाधि वाले बाबा ही तुझे सब कुछ देंगे जो तुझे चाहिए इससे मांगो यह बोलकर बाबा चले जाते हैं और वह दुकानदार हैरान हो जाता है कि मेरे घर में ही मेंरे दुकान में ही मेरे किस्मत की चाबी है और मैं बाहर खोज रहा था वह साफ सफाई करता है नित्य नियम करता है पूजा पाठ करता है ऐसी रहमत होती है बाबा की वह समाधि वाले बाबा थावरदास साहब की वे दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता है पर एक समय ऐसा आता है कि उसके ऊपर आफत का पाहड़ टूट पड़ता है और वह समय था कोरोना काल जब व्यक्ति व्यक्ति से दूर भागता था और सब दुकान मार्केट बंद थी फिर भी वह छुपे छुपा कर आता था दुकान खोलना था और उस समाधि वाले बाबा की सेवा करता था तो कई बार पुलिस उसे पकड़ती थी मारती थी कि बाहर मत निकलो चलो अंदर फिर भी वह आ जाता था और नित्य नियम करता था इसी नितनेम और उसकी सच्ची भक्ति को देखते हुए करोना काल में भी उसका धंधा चल पड़ा और जो कमाई उसे आम दिनों में होती थी उससे 4 गुना ज्यादा कमाई करोना काल में हुई इस सुंदर संदेश देने वाले नाटक की प्रस्तुति बिलासपुर के भक्तों के द्वारा दी गई , दादी साहिबा और नारायण सांई जी ने सभी कलाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं व आशीर्वाद दिया

कार्यक्रम के आखिर में आरती की गई प्रसाद वितरण किया गया आम भंडारा का आयोजन किया गया बड़ी संख्या में लोगों ने भंडारा ग्रहण किया आज के इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में बाबा थावरदास सेवा समिति कटनी के सभी सेवादारियों का विशेष सहयोग रहा इस पूरे कार्यक्रम को कवर करने के लिए हमर संगवारी के प्रधान संपादक विजय दुसेजा विशेष रूप से कटनी पहुंचे आज के कार्यक्रम को कवर किया एवं नारायण सांई जी के द्वारा उनका सम्मान किया गया