उनके सपनों को साकार करने छत्तीसगढ़ सरकार प्रतिबद्ध
पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी पर भावभीनी श्रद्धांजलि
बिलासपुर, 20 फरवरी 2026/उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज स्व. लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में आयोजित पद्मश्री पं. श्यामलाल चतुर्वेदी के जन्म शताब्दी समारोह में उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 2 अप्रैल 2018 को उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जाना केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि संपूर्ण छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और स्वाभिमान का सम्मान था। इस अवसर पर उन्होंने पं. श्यामलाल चतुर्वेदी पर प्रकाशित स्मृति ग्रंथ का विमोचन किया।
उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव ने कहा कि पं. श्यामलाल चतुर्वेदी जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे साहित्यकार, पत्रकार और छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रखर संवाहक रहे। उनका व्यक्तित्व अत्यंत सरल, आत्मीय और जिंदादिल था। एक साधारण गांव से अपनी साहित्य साधना प्रारंभ कर उन्होंने निरंतर परिश्रम और मातृ प्रेरणा से लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उचाईयां प्राप्त की। उन्होंने जीवन पर्यंत छत्तीसगढ़ की माटी, भाषा और लोकसंस्कारों को आगे बढ़ाने का कार्य किया। वे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष रहे और छत्तीसगढ़ी भाषा के संवर्धन में उनका योगदान अविस्मरणीय है। जीवन पर्यंत उन्होंने छत्तीसगढ़ की माटी, भाषा और संस्कारों को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। छत्तीसगढ़ सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मौलिक सृजन को ‘गुरतुर गोठ’ के रूप में स्थापित करना उनकी विशिष्ट पहचान रही है। उनकी भाषा लोककला और लोकजीवन की आत्मा से निर्मित थी। वरिष्ठ पत्रकार श्री जगदीश उपासने ने कहा कि वे छत्तीसगढ़ की प्रतिमूर्ति थे तथा प्रदेश के विविध आयामों को समेटने वाले अमर पुरुष थे।


कार्यक्रम में विधायक सर्वश्री श्री अमर अग्रवाल, श्री धरमलाल कौशिक, श्री सुशांत शुक्ला, श्री अटल श्रीवास्तव, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, वरिष्ठ पत्रकार श्री जगदीश उपासने, डॉ. विश्वेश ठाकरे, वरिष्ठ पत्रकार श्री पीयूष कांति मुखर्जी, पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी के पुत्र श्री सूर्यकांत चतुर्वेदी सहित उनके परिजन, पंडित एवं छत्तीसगढ़ के मूर्धन्य साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद थे। कार्यक्रम में उपस्थित जनों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।