बिलासपुर :- राजा विक्रमादित्य जी का चार दिवसीय मेला उत्सव हुआ श्रद्धा भक्ति के साथ समापन आखिरी दिन पल्लोव की रात, श्री झूलेलाल मंदिर चक्करभाटा के संत श्री लाल दास जी का दिव्य सत्संग समारोह का आयोजन किया गया सांई जी का जैसे ही आगमन हुआ रात्रि 9:00 बजे भक्तों के द्वारा फूलों की माला पहनाकर आरती उतार कर स्वागत सत्कार किया गया सांई जी ने मंदिर पहुंचकर माथा टेका राजा विक्रमादित्य की समाधि पर, दीप प्रज्वलित करके सत्संग आरंभ हुआ इस अवसर पर अनिल पंजवानी व रवि रूपवानी के द्वारा भक्ति भरे शानदार भजनों की प्रस्तुति दी गई जीसे सुनकर भक्तजन भाव विभोर हो गए अब वह घड़ी आ गई जिसका सबको इंतजार था सांई जी के अमृतवाणी से सत्संग रुपी वर्षा का प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी राजा वीर के मेले में सांई जी हाजिरी लगाने पहुंचे थे सांई ने कहा इस मैले का महत्व बहुत बड़ा है यह 70 वां वर्ष है जो मैला मनाया जा रहा है और संत महात्माओं के वर्षी और जन्म उत्सव का महत्व सबसे बड़ा होता है और खासकर ऐसे संतों का यह दर है यहां दुख लेकर आते हैं और सुख लेकर जाते हैं खाली झोली लेकर आते हैं और भरी झोली लेकर जाते हैं छत्तीसगढ़ में तीन राजा वीर के मंदिर हैं एक तोरवा बिलासपुर में दूसरा मुंगेली में तीसरा रायगढ़ में और भारत देश में कहा जाएगा तो चार है इसमें चौथा भोपाल में है

हम बहुत बडे किस्मत वाले है कि हमारे शहर में राजा वीर जी का मंदिर है बाबा गुरमुख दास जी थे तब यहां आते थे मेले में और मौज लगती थी संतों के संग में इस परंपरा को बढ़ाते हुए आज भी प्रत्येक वर्ष मेले में हम हाजिरी लगाने आते हैं मेरी पूज्यनीय माता साहिब भी इस मेले में आती थी और वैसे भी मेरा रिश्ता यहां से अटूट जुड़ा हुआ है माता-पिता के साथ-साथ मेरा यह मेरा मामा घर भी है उन्होंने सत्संग में कहा कि आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से लोग भक्ति की ओर तो जुड़ रहे हैं संतो के संग जुड़ रहे हैं लेकिन साथ-साथ अलग भी हो रहे हैं कहने का तात्पर्य यह है कि लोगों की आस्था जल्दी से डगमगा जा रही है जिस तरह कपड़े (वस्त्र) चेंज करते हैं इस तरह वह गुरु को भी चेंज करने लगे हैं, आज इस गुरु का नाम दान लिया कल दुसरे गुरु को मानने लगे आज इस संत की जयजयकार कर रहे हैं तो कल दूसरे की कर रहे हैं आज अपने यहां इस भगवान की मूर्ति की स्थापना की है तो कल दूसरे संत भगवान की और संत की मूर्ति की स्थापना कर रहे हैं और देख रहे हैं जहां भीड़ जा रही है उसी को फॉलो कर रहे हैं जरूरी नहीं है कि जिस दुकान में भीड़ ज्यादा हो वहां आपको अच्छा माल मिले? जिस पर आपको विश्वास है उस विश्वास को कायम रखें तभी आपका भला होगा संत और भगवान के बदलने से आपका भला नहीं होगा कुछ लोग तनिक फायदे के लिए वह चंद रूपये के लिए अपना धर्म भी परिवर्तन कर लेते हैं और इतने दुख की बात है कि अपने ही समाज के कुछ लोग शामिल हैं जो ऐसा अधर्म का काम करते हैं,? याद रखें सनातन धर्म ही ऐसा धर्म है जहां पर आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी जहां पर आपके बड़े बुजुर्गों को शांति मिलेगी और आपका उद्धार होगा बाकी कोई ऐसा धर्म नहीं है जहां पर मोक्ष की प्राप्ति हो और आपके पूर्वजों का उद्धार हो या आपके आने वाली पीढ़ी का भला हो कुछ समय पूर्व एक स्लोगन बहुत प्रचलित हुआ था चुनाव में

(बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय) “जो बोएगा वही कटेगा”
इसका अर्थ कई लोगों ने अपने-अपने हिसाब से पेड़ लगाया और बोया, सही मायने में देखा जाए तो अर्थ अलग-अलग है पर जो सार है वह एक है की सनातन धर्म ही सर्वश्रेष्ठ धर्म है और हिंदुओं के लिए नेक और पवित्र धर्म है अगर आप इस धर्म को छोड़कर जाते हैं तो आपका विनाश निश्चित है ओर जो व्यक्ति अपने धर्म का न हुआ वह दूसरे धर्म का क्या होगा? सूखी रोटी भी मिले तो घर की रोटी ही सर्वश्रेष्ठ होती है बाहर में अगर छप्पन भोग भी मिले तो वह व्यर्थ का है क्योंकि 56 भोग खिलाने वाला 56 जूते भी मारेगा 56 उपशब्द भी कहेगा फ्री में इतनी देगा तो, वसूली भी करेगा?
इसीलिए कहते हैं घर की सूखी रोटी खाओ घर में ही भगवान का नाम जपो दाल रोटी खाओ राम-राम का नाम लो और अपना घर गुरु का दर इसलिए कहा जाता है आप कहीं भी बाहर जाते हैं घूमने के लिए 15 दिन महीना 2 महीना फिर वापस जब अपने घर आते हैं तो उसका आनंद अलग ही रहता है वह शांति अलग ही रहती है इसलिए दिखावे में मत आओ और भेड़ बकरियों की तरह झुंड में मत घूमो सोच समझकर आगे बढ़ो जो दिखता है वह हकीकत में सही हो ऐसा जरूरी नहीं है भगवान ने बुद्धि दी है तो उसका इस्तेमाल करो अपने बड़े बुजुर्गों का कहना मानो उनसे पूछो अपने गुरु से पूछो सत्य का ज्ञान वही आपको कराएंगे और हमारे धर्म में क्या भगवानों की कमी है एक से एक सर्वश्रेष्ठ इस मानव रूप में जन्म लिया और हमें सीखाने के लिए हमें शिक्षा देने के लिए उन्होंने अवतार लिया राम कृष्ण का अवतार लिया है भगवान विष्णु ने 24 अवतार लिए किसके लिए लिए हम मनुष्य के लिए हमारे लिए सनातन धर्म में ही जल अग्नि वायु की पूजा होगी सनातन धर्म में ही सूर्य और चंद्र की पूजा होगी सनातन धर्म में ही गौ माता व पैडो़ की पूजा होगी इतना सब कुछ होने के बाद भी क्यों भटक रहे हो छप्पन भोग तो तुम्हारे पास है अपने धर्म में रहो एक रहो नेक रहो कार्यक्रम के आखिर में कई भक्ति भरे भजन गाऐ जिसे सुनकर भक्तजन झुम उठे , आखिर में पल्लोव पाया गया प्रसाद वितरण किया गया आए हुए सभी भक्तजनों के लिए आम भंडारा का आयोजन किया गया बड़ी संख्या भक्तों ने भंडारा ग्रहण किया आज के इस पूरे कार्यक्रम का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव प्रसारण किया गया हजारों की संख्या में घर बैठे लोगों ने आज के कार्यक्रम का आनंद लिया और इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में राजा विर मैला समिति व पूज्य सिंधी पंचायत तोरवा के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा इस पूरे कार्यक्रम को कवर करने के लिए हमर संगवारी से प्रधान संपादक विजय दुसेजा विशेष रूप से पहुंचे वह पूरे आयोजन को कवर किया