सिंधी भाषा दिवस पर विशेष
रीवा :-भारत के सिंधी समुदाय के लिए 10 अप्रैल 1967 का दिन एक ऐतिहासिक दिन था क्योंकि इस दिन भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राधाकृष्णनने सिंधी भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने वाले बल पर हस्ताक्षर किए थे इसलिए इस दिवस को सिंधी भाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है
अगस्त 1947 में भारत विभाजन के वक्त पंजाबियों को वादा पंजाब मिला बंगालियों को आधा बंगाल मिला लेकिन सिंधियों को आधा सिम तो क्या उसका एक टुकड़ा तक नहीं मिला और पूरा सैंड हा प्रदेश सरहद के उत्पाद चला गयाअपनी मात्र भूमियों को आजाद भारत में कोई ऐसी जगह नहीं मिली जिसे हिंदी राज्य कह सके
26 जनवरी 1950 को हिंदुस्तान का संविधान लागू हुआ आठवीं अनुसूची में 14 भाषाओं को शामिल किया गया लेकिन सिंधी भाषा कोर्स में शामिल नहीं किया गया
आजादी के 20 साल बाद 21 में संविधान संशोधन अधिनियम के तहत हिंदी को संविधान की आठवीं अनुसूची मैं 15वीं भाषा के रूप में जोड़ा गया
7 अप्रैल 1967 को लोकसभा मे सिंधी भाषा बिल पास होने के बाद
8 अप्रैल को शनिवार और 9 अप्रैल को रविवार होने के कारण सभी सरकारी दफ्तर बंद थे
10 अप्रैल 1967 को चेट्री चंद्र पर्व का दिन था
ऐसे मौके पर जयरामदास दौलतानी जी के प्रयासों से तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधा कृष्णन जी ने बिल पर हस्ताक्षर किए
जिससे सिंधी भाषा आधिकारिक भाषा बन गई
रीवा सिंधी सेंट्रल पंचायत के प्रवक्ता गुलाब साहनी ने जानकारी देते हुए बताया कि
चेटीचंड महोत्सव के दिन सिंधी समाज को यह तोहफा मिल गया
