सच का 🪞आईना
बिलासपुर :- भाग 3 :- हमर संगवारी के पाठक को विज्ञापन दाताओ शुभचिंतकों, आप सभी के प्यार विश्वास के कारण ही हमर संगवारी दिन-ब-दिन आगे बढ़ रहा है और जनहित समाज हित के मुद्दे सच का आईना और विजय की कलम के माध्यम से सामने रख रहा है आपकी आवाज हमर संगवारी है जो जन जन तक पहुंचा रहा है विगत दो सप्ताह से हमने एक नया कलाम चालू किया है सच का आईना इसमें हम समाज के और देश के ऐसे मुद्दे को सामने रखते हैं और उन लोगों के चेहरे सामने लाते हैं जो गलत कार्य कर रहे हैं या गड़बड़ कर रहे हैं या गोलमाल कर रहे हैं ऐसे ही एक मुद्दे को हम लगातार विगत दो सप्ताह से सच का आइना में कहानी के माध्यम से आपको बता रहे हैं जिसका यह तीसरा भाग है तो आगे बढ़ते हैं जैसे कि मैंने पिछले 2भागों में बताया था कि हमारा देश 200 साल तक करीबन गुलाम रहा और चंद अंग्रेजों ने पूरे देश को गुलाम बना कर रखा था उसी तरह हमारे बिलासपुर शहर में भी एक तानाशाह ने पूरे समाज को अपनी मुट्ठी में कैद करके रखा है गुलाम बना के रखा है? अब कैसे रखा है यह सुनिए सबसे पहले इनका एक ग्रुप है इससे पहले भी बताया था जैसे आपने फिल्म देखी होगी अलीबाबा चालीस चोर इस तरह इन लोगों का भी एक ग्रुप है और इसका जो ग्रुप को चलाने वाला व्यक्ति है वह तानाशाह अपने तानाशाही से पूरे इस ग्रुप का संचालन कर रहा है पर इस ग्रुप में पहले चंद लोग थे अब बढ़ते बढ़ते 40 हो गए हैं जो खास लोग हैं सबसे पहले इसने बड़े-बड़े लोगों को अपनी ओर खींचने के लिए अपने बिजनेस में कुछ परसेंट शेयर दिए ,ओर पैसा लगवाया और उनको फायदा दिया इसमें वह इससे जुड़े जब उनको लगा कि हमारा पैसा डबल हो रहा है फायदा हो रहा है तो वह उसे बिल्कुल फेविकोल की तरह जुड़ गए और जब देखा साल दर साल फायदा ज्यादा हो रहा है तो अपनी सत्ता पर बिल्कुल कंट्रोल बनाने के लिए पहले तो उन्होंने संविधान को चेंज कर दिया संविधान को ऐसा बना दिया कि इनके अलावा कोई दूसरा अंदर आ न सके और कुर्सी पर बैठ न सके और जो तानाशाह बोले वही सब हां में हां करते हैं? आज इनका साम्राज्य लाखों में करोड़ों में नहीं बल्कि हजारों करोड़ों में पहुंच गया है तो यह हजारों करोड़ों का साम्राज्य खतरे में इनका पड़ चुका है इनको डर लग रहा है इसलिए उन्होंने अब एक प्लान और बनाया अपने लोगों को जोड़ने के लिए अपनी बेटी उसको दे दी उसकी बेटी खुद ले ली ऐसे रिश्तेदारी बढ़ाने के लिए आपस में बच्चों की शादी करवा दी ताकि रिश्ता और मजबूत हो जाए और यह ग्रुप टूटे ना एक तो पैसे का खेल दूसरे रिश्तेदारी का खेल इसमें दोनों को बंधन में बांध दिया और तीसरा हो गया कुर्सी का खेल अब अगर कोई छोटा-मोटा आदमी आवाज उठाता तो उसको काम दण्ड से या कुछ 💰धन का लालच देकर उसे चुप कर देते पद देकर इस तरह इनका पूरा साम्राज्य तैयार हो गया फिर उसके नीचे में इन्होंने युवाओं को जोड़ा महिलाओं को जोड़ा और कुछ महिला युवा उनके बेटे हैं पत्नी है व भाई है उनकी भाभी है ताकि घर परिवार के ही सदस्य बड़ी पोस्ट में रहे और नीचे में मध्यम वर्ग व कमजोरो को जोड़ा गया था कि वह काम कर सके नाम इनका हो कमाई इनकी हो और साथ में अन्य संस्था बनाते गए और लोगों को इसमें डालते गए जैसे 🌴पेड़ एक रहता है शाखाएँ अनेक रहती है इसी तरह तानाशाह एक है और उसने अलग-अलग संस्था अलग-अलग बनाकर ग्रुपों को उसमें अपने आदमी सेट करता गया ताकि जब भी चुनाव हो तो पूरा कुटुंब एक हो जाए और कोई हरा न सके अगर हारने कि नोबत आ भी जाए तो काम दण्ड सब अपना लेते हैं,? बेईमानी इतनी करते हैं कि बेईमानी भी खुद को देखकर कर शर्म के मारे सर झुका देती है,?

ओर सोचती है कि कहां में फस गई ऐसे बेशर्मों के बीच में? रंग ऐसे बदलते हैं कि 🦎गिरगिट भी बैचारा सोचता है कि लोग फालतू को मुझे बदनाम करते हैं सबसे बड़ा रंग बदलने वाले तो यह लोग बैठे हैं?
तानाशाह को जब कोई समझाता है तो सब को बोलता है कि भैया में आदमी नहीं हूं , मै हिजड़ा हूं? मुझे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है जहां बोलोगे मैं कपड़े उतार दूंगा जहाँ मारना है मुझे मार लो? लेकिन मुझे पैसे दे दो बस मैं पैसे का पुजारी हूं पैसे का भूखा हूं पैसा ही मेरे लिए सब कुछ है? अब ऐसे बेशर्म नंगे आदमी जो खुद बोले तो ऐसे तानाशाह को आप क्या बोलोगे, ?
कुछ लोग बताते हैं कि यह गेंडा 🦏 मोटी चंमडी का 👨आदमी है इसे कुछ फर्क पड़ने वाला नहीं है दूसरा कोई होता तो अभी तक चुल्लू भर 🚰पानी💧 में डूब मरता, या पद छोड़ देता, लेकिन यह छोड़ने वाला नहीं है और आधे समाज का 💵पैसा या अपने बिजनेस में लगा के रखा है ?
जैसे किसी कंपनी का प्रोडक्ट चल निकलता है और लोगों को आदत पड़ जाती है फिर उसका रेट बढ़ा दो, या उसमें आप मिलावट भी कर दो तो लोग खरीद लेते हैं जिसका सीधा उधारण आप जिओ कंपनी को देख लीजिए स्टार्टिंग में आई थी वह फ्री में सिम बाट रही थी फ्री में इंटरनेट फ्री में दे रही थी और आज देखो किस तरह खून चूस रही है रेट बड़ा-बड़ा कर आम जनता के, इसी तरह का रास्ता अपनाता है तानाशाह यह न सत्ता छोड़ेगा और नहीं किसे छोड़ने देगा यह श्री झूलेलाल मंगलधाम जो हमारे आराध्य देव भगवान झूलेलाल के नाम से बना है
ऐसे घिनौने काम हुए हैं?
वहां पर उसे बताने में मुझे शर्म आती है, ?
लेकिन क्या करूं सच बताना जरूरी है नहीं बताऊंगा तो मेरा भगवान मुझे माफ नहीं करेगा मेरी आत्मा मुझे माफ नहीं करेगी और मेरा धर्म मुझे माफ नहीं करेगा यहां पर एक आदमी को रखा गया जो छातीर बदमाश है जिसका नाम है शकूनी,? जेसे महाभारत में शकुनि थाना जो पूरी महाभारत करवाई , ओर एक शकूनी ईधर भी महाभारत का खेल खेलता हैं इन 40 चोरों का सरदार के बाद अगर किसी का दिमाग चलता है और पावर है तो शकुनि का है दिमाग चलता है ?
इसने इस श्री झूलेलाल मंगल धाम बिलासपुर कि 👉 डोर अपने हाथ में ली ?और उस समय में दो नंबरी धंधा करके बहुत पैसा कमा लिया हर किसी से, टेंट वाले से लाइट वाले से दलाली खाने लगा?
मतलब टोटल दलाल का काम करने लगा आगे चलकर यह बड़ा दलाल बना ?अब सिर्फ जमीन का दलाल नहीं बल्कि आप समझदार हैं उनका भी दलाल बना? और अपने आकाओ को खुश करने के लिए शराब कबाब शबाब सब का इस्तेमाल होने लगा? दूसरों के लिए बैंन था पर यहाँ आकाओ के लिए सब कुछ ओपन था? दूसरों पर जुर्माना लगाता था ? उसे फंसा कर वसूली करता था? बहुत गलत कार्य करता था? कहते हैं कि हम समाज को कम रेट में देते हैं और अन्य समाज को ज्यादा रेट में देते हैं? ओर शकुनी क्या करता था अन्य समाज की शादियां होती थी तो बिल कटता था कि समाज की शादी हुई है? और उसमें भी कटिंग करके पैसा खा जाता था ?जो भी छोटे-छोटे कार्य होते थे उसमें दलाली खाता था? किसी को नहीं छोड़ता था यहां तक की डॉट डॉट को भी नहीं? यह जब बात पता चली शहर में पहले तो कुर्सी हिलने लगी डर 😱 हो गया कि कहीं कुर्सी ना चली जाए गिर ना जाए इसलिए दिखावे के लिए जैसे नेता कार्रवाई करते हैं पुलिस कार्रवाई करती है?
इस तरह के लिए कार्रवाई करके उसे पद से मुक्त कर दिया पर पर्दे के पीछे पूरा खेल खेलता रहा ?लोगों को दिखाने के लिए, सब कुछ इसे पता है सारे डॉक्यूमेंट भी इसी के पास में है ? इसलिए उसे जाने दे नहीं सकते बड़ा राजदार है? और काम का आदमी है ? संविधान की धजिया तो ऐसे उड़ा रहे हैं जैसे कोई बच्चा कॉपी का पन्ना फाड़ के उड़ता है? बस बार-बार एक ही बात बोलते हैं कि हम ईमानदार हैं। अच्छा काम कर रहे हैं तो मेरा भी सवाल एक है आप अच्छे हो सच्चे हो तो हिसाब क्यों नहीं सामने रखते हो ? और सबसे बड़ी कहानी का टर्निंग पॉइंट है जब से यह भवन बना है सिर्फ एक ही व्यक्ति इसका निर्माण किया है उसका नवनिर्माण किया है? जो भी कार्य कार्यक्रम होगा काम होगा वह व्यक्ति को ठेका मिलता है ? जैसा कि सूत्रों से जानकारी मिली रही है ऊपर जो 20 रूम बना हैं अभी हाल ही में उसमें भी इस व्यक्ति का हाथ है? जब बार-बार एक ही संस्था या कंपनी को काम मिलता है तो समझ जाना चाहिए कि गोलमाल बहुत कुछ है ? यहाँ क्या ठेकेदारों की कमी है या काम करने वालों की कमी है जो एक ही कंपनी को ठेका दिया जा रहा है? क्योंकि कंपनी का मालिक तानाशाह है? ठेकेदार भी तानाशाह के हैं? दिखाने के लिए ₹1 दान में दे देता है और ठेके से ₹20 कमा लेता है ?
आम के आम और गुटलियों के दाम लोगों की नजर में महान बन जाता है दानदाता बन जाता है और इधर माल समेट लेता है? और थूक पॉलिश जैसा काम करता है ? जैसे चीनी आइटम का कोई भरोसा नहीं चल गया तो चांद तक नहीं चला तो पाकिस्तान तक इस तरह इसका बनाया हुआ प्रोजेक्ट पूरे शहर में जहां भी देख लीजिए बनाया है सब थूक पालिस वाला काम है? चमकेगी जरूर लेकिन चलेगा नहीं? 2 दिन की चांदनी है फिर वही अंधेरा वाली कहावत है? उसके बाद भी कोई आवाज नहीं उठाता की सब का हिस्सा बंधा हुआ है? सबको रोजी-रोटी मिल रही है ?और पद भी मिल रहा है? इसीलिए सब चुप बैठे हैं? जो बोलता है उसे चुप करा देते हैं ? अपने आप को राजा हरिश्चंद्र की औलाद समझते हैं लेकिन हकीकत में यह … कि औलाद हैं, ? झूठ को ऐसे बोलते हैं जैसे जलेबी रबड़ी में डालकर खाते हैं जैसे रसगुल्ला चासनी में डालकर खाते हैं? और उनके शरीर में खून से ज्यादा झूठ के कीडे़ अंदर है विश्वास घाट के कीटाणु भरे पड़े हैं? सच बोलना चाहते नहीं है सच सुनना चाहते नहीं है? सच की राह पर चलना पसंद करते नहीं है? बहुत जल्द इनका पूरा बही खाता जनता के सामने रखेंगे सबूत के साथ रखेंगे अब फैसला जनता की अदालत में होगा उनके पूरे काले कारनामों का चिट्ठा खुलेगा उनके चेहरे से नकाब हटेगा और सच का आईना में इनका असली चेहरा समाज को दिखेगा जुड़े रहिए हमर संगवारी के संग अगले अंक में इस कहानी का अंत करेंगे सारे सबूत के साथ आपके सामने फिर आएंगे आपके विश्वास के साथ सच का आईना लेकर
सत्यमेव जयते
