दिल्ली :- सिंधी समाज के गौरव, वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक सिंधुपति महाराजा दाहिर सेन के पावन बलिदान दिवस पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। 16 जून 712 ईस्वी को उन्होंने अरब आक्रमणकारी मोहम्मद बिन कासिम के विरुद्ध अपनी मातृभूमि, धर्म और प्रजा की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। वे सिंध के अंतिम हिंदू सम्राट थे, जिनके शौर्य और नेतृत्व के कारण दशकों तक विदेशी आक्रमणकारी सिंध की सीमाओं में प्रवेश नहीं कर सके।
इस अवसर पर लाल साईं मंदिर, जनकपुरी, नई दिल्ली में मंगलवार, 16 जून, सायं 7:00 बजे से एक विशेष “चंड जी मोज़” का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भजन, कीर्तन, पल्लव एवं ज्योत के माध्यम से महाराजा दाहिर सेन को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
विशेष आकर्षण:
दिल्ली की सुप्रसिद्ध भजन गायिका श्रीमती निशा वासवानी अपनी मधुर प्रस्तुतियों से भक्तिमय वातावरण बनाएंगी।
🌟 पहली बार मंच पर
हमारी दो प्रतिभाशाली और अब तक छिपी हुई कलाकार — श्रीमती हर्षा वासु एवं श्रीमती तानिया खिलवानी — अपनी सुरीली गायकी से सभी को मंत्रमुग्ध करेंगी ।
लाल साईं मंदिर, जनकपुरी,
नई दिल्ली
सायं 7:00 बजे से
जय झूलेलाल • जय सिंध • जय महाराजा दाहिर सेन
