बिलासपुर, 15 जून। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं लोकतंत्र प्रहरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय था। उस दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया तथा हजारों लोकतंत्र सेनानियों, पत्रकारों और विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। इसलिए नई पीढ़ी को उस कालखंड की वास्तविक जानकारी देना समय की आवश्यकता है।
राघवेन्द्र राव सभा भवन परिसर स्थित बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उपासने ने बताया कि लोकतंत्र सेनानी संघ एवं लोकतंत्र प्रहरी द्वारा प्रतिवर्ष 25 जून को आपातकाल की वर्षगांठ पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए और लोकतंत्र को गंभीर आघात पहुंचा।
उपासने ने बताया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित अनेक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह किया तथा कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष जारी रखा। अंततः वर्ष 1977 के आम चुनाव में लोकतंत्र की विजय हुई और तानाशाही प्रवृत्तियों की पराजय हुई।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा के बाद लोकतंत्र प्रहरी ने यह संकल्प लिया है कि भावी पीढ़ी को भी आपातकाल के इतिहास से परिचित कराया जाए। इसी उद्देश्य से प्रदेश स्तरीय शालेय एवं महाविद्यालयीन निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई।
उपासने ने बताया कि विद्यालय स्तर पर “आपातकाल कभी विस्मृत न हो” तथा महाविद्यालय स्तर पर “25 जून संविधान हत्या दिवस की प्रासंगिकता” विषय पर निबंध आमंत्रित किए गए थे। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 520 निबंध प्राप्त हुए, जिनका मूल्यांकन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया।
उन्होंने जानकारी दी कि आगामी 28 जून 2026 को रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में लोकतंत्र सेनानियों एवं लोकतंत्र प्रहरियों के परिवार सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर निबंध प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। प्रथम पुरस्कार 31 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 21 हजार रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 11 हजार रुपये रखा गया है। इसके अतिरिक्त दस-दस प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।
उपासने ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे तथा सहभागी विद्यालयों और महाविद्यालयों के प्राचार्यों का भी सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में लोकतंत्र प्रहरी द्वारा भाषण, निबंध, वाद-विवाद एवं अन्य बौद्धिक प्रतियोगिताओं का आयोजन कर युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों और देश के इतिहास से जोड़ने का कार्य निरंतर जारी रखा जाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में दत्ता त्रिपुरवार, सुहास देशपांडे, अर्जुन तीर्थंणी, सुनील पुराणिक भी उपस्थित थे।
