
बिलासपुर। मानसून ने दस्तक दे दी है, लेकिन शहर को जलभराव से राहत दिलाने के दावे अब भी फाइलों में ही कैद हैं। नगर निगम द्वारा शहर में 28 बड़े नाले और आधुनिक स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की करीब 100 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना आज तक अमल में नहीं आ सकी है। परिणामस्वरूप इस वर्ष भी शहर के अनेक इलाकों में बारिश के दौरान जलभराव की पुरानी समस्या बरकरार रहने की आशंका है।100 करोड़ रुपये की जल निकासी योजना अब तक धरातल पर नहीं नगर निगम ने जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई प्रस्ताव तैयार किए थे। इनमें 10 से अधिक प्रमुख नालों को राज्य आपदा प्रबंधन योजना में शामिल भी किया गया, लेकिन अब तक आवश्यक स्वीकृति नहीं मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। ऐसे में इस मानसून में न तो नए नाले बन पाएंगे और न ही स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नेटवर्क विकसित हो सकेगा। हर वर्ष बारिश के दौरान कोनी, इंदिरा विहार, चांटीडीह, जरहाभाठा, नेहरू नगर, तालापारा, बस स्टैंड क्षेत्र, विनोबा नगर, राजकिशोर नगर सहित कई मोहल्लों की सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं। जलभराव के कारण आमजन को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं व्यापार और यातायात भी प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर के अनियोजित विकास, नालों पर अतिक्रमण, जल निकासी मार्गों के संकरा होने तथा नियमित सफाई के अभाव में समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।हर साल की तरह इस बार भी जलभराव से जूझने को मजबूर होंगे नागरिक कई स्थानों पर नालों की क्षमता कम होने के कारण थोड़ी देर की बारिश में ही पानी सड़कों पर फैल जाता है। नगर निगम का कहना है कि जलभराव वाले क्षेत्रों का सर्वे कर समाधान की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर नालों का चौड़ीकरण और नए नालों के निर्माण की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ इस मानसून में मिलना संभव नहीं दिख रहा।जनता का सवालशहरवासियों का कहना है कि हर वर्ष बारिश से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मानसून शुरू होते ही सड़कों पर पानी भर जाता है। करोड़ों रुपये की योजनाएं आखिर कब जमीन पर उतरेंगी और नागरिकों को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत कब मिलेगी ? यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
