
05 जुलाई रविवार को मनाया गया। 05 जुलाई को रविवार होने की वज़ह से बड़े बुजुर्गो सहित बच्चों को भी इस कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर प्राप्त होगा। जिससे उन सभी बच्चों को भी समाज के रीति-रिवाजों, तीज-त्योहारों एवं सिन्धी संस्कृति को नजदीकी से जानने समझने का अवसर प्राप्त होगा।5 जुलाई के दिन को विश्व़ पकौड़ा दिवस मनाने का संकल्प लिया गया।बारिश के मौसम में पकौड़े की कल्पना मात्र से ही आनंद आ जाता है। तो अब आप सोचिए कि उसे सामने देखकर खाने में कितना आनंद आता होगा।पकौड़े में अक्सर आलू, प्याज और मिर्च जैसी सब्जियाँ होती हैं, जिन्हें मसालेदार बेसन के घोल में लपेटकर तेल मे तला जाता है। ब्रेड पकोड़ा, आलू पकोड़ा, बैंगन पकोड़ा, प्याज पकौड़ा, मिर्च पकोड़ा, पालक पकोड़ा, गोभी पकोड़ा, पनीर पकौड़ा, ढे़ंस पकोड़ा, मिर्च पकोड़ा सहित कई प्रकार के पकोड़े बनाये जा सकते है।पकौड़े खाने की इच्छा और उसके बनने या आप तक पहुंचने के बीच का जो समय होता है..उसमें गजब की बेचैनी होती है। यही बेचैनी पकौड़े के स्वाद और खाने के आनंद को बढ़ा देती है।*”माँ”* के हाथों से बने पकौड़े में अनुभव और प्यार की मिठास होती है, तो *”पत्नी”* के हाथों से बने पकौड़े में मेहनत और प्यार से भरी जिम्मेदारी का एहसास होता है। कुल मिलाकर यही कहना चाहूँगा कि घर के बने पकौड़े और चटनी सबसे उत्तम और सर्वश्रेष्ठ होते है। इसका स्वाद आनंद और ख़ुशी से भर देता है।वैसे तो वर्षा ऋतु का आगमन हमारे तन मन को सराबोर कर देता है..लेकिन बरसात का मौसम आरंभ होते ही हमारी भारतीय संस्कृति में पकोड़े खाने की जो प्रथा, परंपरा या विरासत है, वह कोई मज़ाक नहीं बल्कि इसके पीछे 100 प्रतिशत वैज्ञानिक कारण है और पकौड़ा आपके स्वास्थ्य के लिए अति अनुकूल भी माना जाता है।आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में जब हवा में नमी की मात्र अधिक होती है उस समय शरीर में वात (वायु) का प्रकोप रहता है जिसे नियंत्रण में लाने के लिए शुद्ध तेल में बनी चीज़ों का सेवन करना चाहिए। क्योंकि तेल (शुद्ध तेल रिफाइंड तेल नहीं) वातनाशक होता है इसलिए हमारे यहाँ वर्षा ऋतु में पकोड़े खाने की परंपरा विकसित हुई है।पकौड़ा हमारे स्वास्थ्य के दृष्टिकोंण से भी महत्वपूर्ण है..क्योंकि इसमें आपके आहार में पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियों का इस्तेमाल अधिक से अधिक शामिल करने का एक शानदार तरीका है..क्योंकि पकौड़े अक्सर विभिन्न प्रकार की सब्जियों के साथ बनाए जाते हैं।पकौड़े विटामिन का भी एक बेहतरीन स्रोत हैं। ये विटामिन क्रमशः आपकी त्वचा और आपके ऊर्जा स्तर को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं। जिनमें से प्रत्येक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सिडेंट अपना-अपना अनूठा लाभ प्रदान करता है।पकौड़े खाने से यह फायदे होता है..कि इसमें प्रयुक्त फाइबर आपकी पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखने में मदद करता है और आपकी तृप्ति की भावना को भी बढ़ाता है..जिससे आपकी ज़्यादा खाने की इच्छा कम होती है।आयुर्वेद के अनुसार सावन (वर्षा ऋतु) में दही..छाछ..दूध..हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन वर्जित माना गया है..क्योंकि यह वात (वायु) वर्धक होते है। इसलिए इन्हें सावन में नही खाया जाता है..अपितु इन सभी को महादेव पर अर्पित किया जाता है..क्योंकि ऐसी मान्यता है कि महादेव हर प्रकार के विष को ग्रहण कर लेते है।इसलिए सावन में इन खाद्य पदार्थों का सेवन नही किया जाना चाहिए।पकौडे़ बनाने में केवल शुद्ध तेल का ही प्रयोग करना चाहिए..रिफाइंड तेल का उपयोग नही करना चाहिए..क्योंकि तेल को रिफाइंड करने के बाद उसका वातनाशक गुण समाप्त हो जाता है।इसलिए बरसात आते ही पकौड़े अवश्य खाएं और सबको खिलाएं।विश्व़ सिन्धी पकौड़ा जैसे आयोजन सिन्धी समाज में एकता कायम करने का आपस में मेल मुलाकात करने का और आने वाली भावी पीढ़ी को अपने सिन्धी समाज के रीति-रिवाजों, तीज-त्योहारों एवं सिन्धी समाज की संस्कृति से अवगत कराने का एक बहुत ही अच्छा अवसर है।आज़ लोग घरों में या कुछ लोग एक स्थान पर एकत्रित होकर इस प्रकार के दिवसों का आयोजन करते है, लेकिन हमें आशा ही नही वरन् पूर्ण विश्व़ास है कि भविष्य में इसका प्रचार-प्रसार किया जायेगा एवं इस प्रकार के दिवसों को पूज्य सिन्धी पंचायतों के बैनर तले पंचायत भवनों एवं अन्य सामाजिक भवनों में भी आयोजित करने का प्रयास किया जायेगा।इस प्रकार के आयोजनों का मूल उद्देश्य यही है कि सिन्धियत खुशबू बनकर समाज में महकती रहे।*मौसम भी है, बारिश भी है। मौका भी है और दस्तूर भी है और हम सिन्धी भी हैं। तो आइए मनाते हैं और बनाते है इस दिन को कुछ खास.!*संकलन एवं साभार प्रस्तुति:-*इन्दू गोधवानी, रायपुर..✍️* 9425514255
