
*,सच अक्सर कटघरे में खड़ा मिलता हैझूठ ऊँची आवाज़ में बोलकर भी सम्मान बड़ा पाता है।चेहरों की भीड़ में चरित्र का मूल्य प्रतिदिन घटता जाता हैफिर भी सत्य का सूर्य देर से सही,पर अंधकार हर ले जाता हैग़लत लोग गलती करके भी अकड़ की चादर ओढ़ लेते हैंसही लोग झूठे इल्ज़ामों से भीतर ही भीतर टूट जाते हैं।समय की अदालत में हर निर्णय तुरंत नहीं लिखा पाता कर्म का न्याय मौन रहकर भी कभी अधूरा नहीं रह जाताहर सच हर समय पर कहना बुद्धिमानी नहीं कहलातागलत वक्त पर सच बोलना भी अक्सर तूफ़ान बन जाताविवेक वही है जो समय का उचित क्षण पहचान सकेमौन भी कई बार सत्य का सबसे ऊँचा सम्मान बन सके मुसीबत आने से पहले तक सुकून का एहसास रहता हैमुस्कान ही हर पीड़ा का सबसे सस्ता उपचार बनता हैदो चम्मच हँसी और चुटकी भर अपनापन रोज़ बाँटते चलोयही दौलत अंत तक साथ रहतीहै,बाकी यहीं रह जाता हैअंधेरे में छाया,बुढ़ापे में काया,अंत समय में माया छूट जाती हैसाथ केवल कर्मों की सुगंध और आत्मा की सच्चाई जाती हैपरिस्थितियों से हारकर स्वयं को कभी मत तोड़ोसमय का धर्म ही परिवर्तन है,हर रात के बाद नई सुबह आती है*लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318*
