
सुरेश सिंह बैस बिलासपुर। मानसून की दस्तक के साथ एक बार फिर जल संरक्षण की तैयारियों की हकीकत सामने आ गई है। नगर निगम क्षेत्र के 309 शासकीय भवनों में से केवल 254 भवनों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित हो पाया है, जबकि 55 शासकीय भवन आज भी इस महत्वपूर्ण व्यवस्था से वंचित हैं। नतीजतन, हर बारिश में लाखों लीटर बहुमूल्य वर्षा जल सीधे नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है।309 में से 254 भवनों तक ही सीमित रहा अमलजल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शासन ने शासकीय, अर्धशासकीय और निजी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य किया है। इसके बावजूद कई सरकारी कार्यालयों में इस नियम का पालन अब तक नहीं हो सका है। इनमें पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य विभाग, कलेक्ट्रेट परिसर, छात्रावास, तहसील भवन, स्कूल और कुछ पुलिस थानों सहित अन्य कार्यालय भी शामिल हैं।हर साल लाखों लीटर वर्षा जल हो रहा व्यर्थनगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, 309 शासकीय भवनों में से 254 भवनों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की जा चुकी है, लेकिन शेष 55 भवनों में अब भी यह कार्य लंबित है। कुछ विभागों ने भवनों में पर्याप्त स्थान नहीं होने का तर्क दिया है, जबकि कई स्थानों पर अब तक कोई ठोस पहल ही नहीं की गई।शासन ने जारी किए थे स्पष्ट निर्देशनगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मई माह में सभी शासकीय, अर्धशासकीय और निजी संस्थानों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से स्थापित करने के निर्देश दिए थे। 150 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों में इसकी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए समय-सीमा भी तय की गई थी। साथ ही नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए थे।घटते भूजल स्तर के बीच चिंता बढ़ीविशेषज्ञों का मानना है कि लगातार गिरते भूजल स्तर और गर्मियों में बढ़ते पेयजल संकट को देखते हुए वर्षा जल का संरक्षण समय की आवश्यकता बन चुका है। यदि प्रत्येक सरकारी भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम प्रभावी ढंग से स्थापित किया जाए तो भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है और जल संकट से काफी हद तक राहत मिल सकती है।निजी भवनों पर सख्ती, सरकारी भवनों में ढिलाईनगर निगम निजी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर लगातार सख्ती बरत रहा है। भवन अनुज्ञा और पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में भी इसे अनिवार्य किया गया है। इसके विपरीत, कई सरकारी भवनों में अब तक इस नियम का पालन नहीं होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। नगर निगम का दावानगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शेष भवनों में भी चरणबद्ध तरीके से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही इंजेक्शन वेल जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वर्षा जल के अधिकतम संरक्षण की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।किया जा रहा है प्रयासरेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने नगर निगम द्वारा प्रयास रहता है। इसके अलावा इस बार इंजेक्टवेल बनवाया जा रहा है, और कई स्थानों पर इंजेक्टवेल बनकर तैयार भी हो गया है। इंजेक्टवेल बारिश के पानी को संरक्षित करने ज्यादा कारगर है।- खंजाची कुम्हार, अपर आयुक्त, नगर निगम बिलासपुरसवाल अब भी कायमहर वर्ष मानसून आता है, वर्षा होती है और जल संरक्षण के दावे दोहराए जाते हैं। लेकिन जब स्वयं सरकारी भवनों में ही नियमों का पूर्ण पालन नहीं हो पा रहा है, तो आम नागरिकों से जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा कितनी प्रभावी होगी? यह प्रश्न आज भी जवाब की प्रतीक्षा में है।
