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श्रेष्ठ दंपती बनने के लिए विश्वास कभी ना तोड़े – श्री ओमप्रकाश जी
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अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के द्वारा रचित 3200 साहित्यों में परिवार निर्माण से संबंधित पुस्तक, जिसमें प्रज्ञापुराण (परिवार खंड),गृहस्थ में प्रवेश से पूर्व उसकी जिम्मेदारी समझें, विवाहित जीवन का अलौकिक आनंद, गृहस्थ एक सिद्धाश्रम, बाल निर्माण कहानियां आदि सफल – सुखी दांपत्य जीवन के लिए एवं परिवार में सुसंस्कारिता संवर्धन हेतु अवश्य ही पढ़ना चाहिए।इसके साथ ही परम पूज्य गुरुदेव परिवार को सुखी और संगठित रखने के 5 व्यावहारिक सिद्धांत पारिवारिक पंचशील के रूप में लिखते हैं कि
हम सभी को
श्रमशीलता, मितव्ययिता , सुव्यवस्था, शालीनता-शिष्टता, उदार सहकारिता ( परिवार में परस्पर सहयोग की भावना) के गुणों को विकसित करके परिवार को आदर्श बना सकते हैं।
गायत्री परिवार के मीडिया प्रभारी से श्री द्वारिका प्रसाद पटेल ने बताया कि शिविर के उद्बोधनों से प्रभावित होकर गायत्री शक्तिपीठ में सम्मिलित 70 नव दंपतियों ने दांपत्य जीवन के दस स्वर्णिम सूत्रों के पालन का संकल्प लिया। सभी ने अनुभव किया कि परिवार को स्वर्ग बनाने के लिए,
सुखी व सफल दाम्पत्य जीवन के लिए श्रेष्ठ दंपती ही श्रेष्ठ परिवार को गढ़ करके सभ्य समाज की स्थापना कर सकता है।
कार्यक्रम में लगभग 70 नव दंपतियों सहित कुल 150 परिजनों की उपस्थिति रही और कार्यक्रम भक्तिमय, प्रेरणादायी बना रहा।
इस अवसर पर शांतिकुंज, हरिद्वार की टोली के प्रशिक्षित बहनें श्रीमती गायत्री सोनी , दुर्गेश नंदिनी गुप्ता एवं पूर्णिमा श्रीवास ने दांपत्य जीवन के 10 अमूल्य संकल्पों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। प्रशिक्षित बहनों ने संदेश दिया कि पति पत्नी का संबंध अत्यंत नाजुक होता है और वह भावनाओं पर आधारित होता है, इसलिए भावनाओं का सदैव सम्मान होना चाहिए। साथ ही प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ प्रमुख श्री ओमप्रकाश राठौर जी एवं बिलासपुर उपजोन समन्वयक प्रमुख श्री धनसाय बैगा जी, गायत्री परिवार ट्रस्ट कार्यकारिणी समन्वयक श्रीमती आशा सुल्तानिया, सहा. प्रबंध ट्रस्टी श्रीमती सविता तिवारी ने दंपतियों को सुखी परिवार निर्माण के लिए प्रेरित किया। युवा प्रकोष्ठ प्रमुख श्री ओमप्रकाश राठौर जी ने कहा कि यह हृदयंगम करना आवश्यक है कि
विचारधाराओं में अंतर स्वाभाविक है, किंतु जीवनसाथी परस्पर श्रेष्ठ दंपती बनने के लिए विश्वास कभी ना तोड़े।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमुख सहयोगी श्री एसपी चौहान जी, सुश्री मनोरमा कोरी, सुश्री रोमा साहू, सुश्री सोमलता साहू, श्रीमती शोभा सोनी, श्रीमती सुशीला यादव, सुश्री प्रमिला कौशिक, सुश्री रीना ठाकुर, सुश्री सवित्री गढ़वाल, श्री बी आर ध्रुवे, श्री वेदराम सिन्हा जी, श्री के के श्रीवास, श्री सुरेन्द्र गुप्ता जी, श्री दीना कौशिक, श्री योगेश साहू श्री द्वारिका साहू सहित गायत्री परिवार के समस्त कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वक्ताओं ने बताया कि गृहस्थ जीवन एक तपोवन है, जिसमें संयम, सेवा और सहनशीलता की साधना आवश्यक है। विश्वास, प्रेम, सहयोग और सम्मान ही दांपत्य जीवन की धुरी हैं। श्रेष्ठ संतान और श्रेष्ठ समाज के निर्माण के लिए पहले हमें श्रेष्ठ दंपति बनना होगा। अंत में सभी प्रतिभागियों ने दांपत्य जीवन को संस्कार, समर्पण और सद्भाव से सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। उपस्थित सभी ने इसे अपने जीवन की एक अविस्मरणीय अनुभूति बताया।
