
अमरावती से पहुँचे सैकड़ों श्रद्धालु/ अमरावती:छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित भारतीय सनातन संस्कृति का प्रतीक तीर्थ स्थल पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ पूज्य संतश्री डॉ युधिष्ठिर लाल जीके सानिध्य में पूज्य माता साहिब हासी देवी जी के 200वें जन्मोत्सव (द्वि-शताब्दी समारोह) का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस पावन और ऐतिहासिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए महाराष्ट्र के अमरावती शहर से सैकड़ों की संख्या में सिंधी समाज के श्रद्धालु विशेष रूप से रायपुर पहुँचे थे।गुप्त नवरात्रि (15 से 22 जुलाई 2026) के पावन प्रसंग पर आयोजित इस भव्य महोत्सव में भारत और विदेशों (हिंद-सिंध) से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।महोत्सव के प्रमुख आकर्षण एवं मुख्य कार्यक्रम:श्री देवी भागवत कथा का शुभारंभ (15 जुलाई 2026): दरबार तीर्थ प्रांगण में पवित्र गुप्त नवरात्रि के चंद्र दिवस परश्री देवी भागवत कथा का भव्य आरंभ हुआ, कथा व्यास – पूज्य जगद्गुरुस्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज द्वारा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान व रसपान कराया गया।स्वर्ण एवं चांदी मूर्ति का अनावरण (15 जुलाई 2026): इस द्विशताब्दी महोत्सव का एक मुख्य आकर्षण पूज्य माता साहिब हासी देवी जी की स्वर्ण एवं चांदी निर्मित मनमोहक मूर्ति का अनावरण रहा, जिसके दर्शन कर भक्तगण भाव-विभोर हो उठे।कलश यात्रा और उपहार वितरण (15 जुलाई 2026): इस दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई, साथ ही श्रद्धालुओं को भजनों की सीडी और विशेष स्मृति स्वरूप लॉकेट का वितरण किया गया।आदर्श सामूहिक शुभ विवाह (19 जुलाई 2026): समाज में सेवा और भाईचारे का संदेश देते हुए रविवार के दिन ‘आदर्श सामूहिक शुभ विवाह’ का आयोजन किया गया, जिसके बाद रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सबका मन मोह लिया।रास लीला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ (20 जुलाई 2026): शदाणी बालकों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गयाकथा पूर्णाहुति और विशाल प्रसादी (21 जुलाई 2026): श्री देवी भागवत महापुराण कथा यज्ञ के पूर्णाहुति के साथ ही महोत्सव का समापन हुआ और उपस्थित समस्त श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का वितरण किया गया।दिव्य ज्योति प्रज्वलन (15 से 22 जुलाई 2026): गुप्त नवरात्रि के इन नौ दिनों के दौरान हिंद-सिंध के सभी 14 प्रमुख शदाणी दरबारों में विशेष ज्योति जलाई गई, जिससे पूरा वातावरण अध्यात्ममय हो गया।अमरावती के श्रद्धालुओं की विशेष उपस्थितिअमरावती से पहुँचे श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक आयोजन को अपने जीवन का एक अलौकिक अनुभव बताया। शदाणी दरबार के पीठाधीश्वर पूज्य संत श्री डॉ युधिष्ठिर लाल जीके सानिध्य में संपन्न हुए इस महाउत्सव ने देश और दुनिया भर के सिंधी समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। अमरावती लौटने पर श्रद्धालुओं ने इस यात्रा को अविस्मरणीय बताते हुए दरबार के प्रति अपनी अनन्य आस्था प्रकट की।
