
बिलासपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों तक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन उचित मूल्य दुकानों पर है, उनमें से कई दुकानों के संचालन को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जिन दुकानों को विभिन्न अनियमितताओं के चलतें वर्षों पहले निलंबित किया गया था, वे आज भी कथित रूप से दूसरे लोगों के माध्यम से संचालित हो रही हैं। इससे खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।जानकारी के अनुसार शहर में कई उचित मूल्य दुकानों का संचालन मूल आवंटित समूहों या समितियों के बजाय कथित ठेकेदारों के माध्यम से किया जा रहा है। आरोप है कि इन दुकानों में गरीब हितग्राहियों के लिए निर्धारित चावल का अवैध कारोबार भी किया जा रहा है। हितग्राहियों को राशन के बदले नकद राशि या अन्य विकल्प देकर सरकारी चावल खुले बाजार में बेचने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं।निलंबित दुकानें फिर कैसे हो रहीं संचालित?खाद्य विभाग ने जिन दुकानों को अनियमितताओं के कारण निलंबित किया था, उनके संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था समय पर नहीं की गई। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर वही दुकानें कथित तौर पर पुराने नेटवर्क के माध्यम से संचालित होती रहीं। विभागीय कार्रवाई केवल आदेशों तक सीमित दिखाई दे रही है।क्यों छिपाई जा रही पहचान ?मैग्नेटो मॉल के सामने से मरीमाई तालापारा वाले मार्ग पर अंबेडकर प्राथमिक उपभोक्ता भंडार आईडी क्रमांक 401001022 संचालित है। इसी दुकान में जय माता दी खाद्य सुरक्षा पोषण आहार नामक दुकान मर्ज कर दी गई है. जिसका आईडी क्रमांक 401001121 है। ज्ञात हो कि यह दुकान वर्ष 2023 से निलंबित है। सूत्रों के अनुसार इसी छोटी दुकान से ही अन्य कई राशन दुकानों का भी संचालन किया जा रहा है। आईडी क्रमांक 401001133 राजेंद्र नगर, 401001025 तारबाहर की दुकान भी ठेके पर ही चलाई जा रही है।किराए पर दुकानें, संचालन किसी और के हाथमामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि कुछ राशन दुकानों को किराए पर लेकर उनका संचालन दूसरे लोग कर रहे हैं। कई दुकानों पर मूल संचालक का नाम है, जबकि वास्तविक संचालन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए जाने की शिकायतें हैं। यदि यह सही है तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जाएगा।खाद्यान्न की हेराफेरी के आरोपस्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ दुकानों में हितग्राहियों को पूरा राशन नहीं दिया जाता, जबकि शेष खाद्यान्न खुले बाजार में खपाया जाता है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो करोड़ों रुपये के सरकारी खाद्यान्न के दुरुपयोग का खुलासा हो सकता है।विभाग का पक्षजिला खाद्य अधिकारी का कहना है कि नियमों के अनुसार किसी भी उचित मूल्य दुकान का संचालन ठेके पर नहीं किया जा सकता। यदि कहीं ऐसी शिकायत मिलती है तो जांच कर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।पारदर्शी जांच की आवश्यकताविशेषज्ञों का मानना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। जिन दुकानों को निलंबित किया गया है, उनकी वर्तमान स्थिति, वास्तविक संचालकों, खाद्यान्न वितरण और स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया जाए। दोषी पाए जाने पर संबंधित संचालकों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। गरीबों के हक के राशन से जुड़ा यह मामला केवल विभागीय अनियमितता नहीं, बल्कि जनहित और सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है। इसलिए आवश्यक है कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे।
